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मजदूर परिवार की शिकायत पर आर्मी करेगी शोपियां मुठभेड़ की जांच

परिवार का कहना है कि ये तीनों 17 जुलाई को दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में मजदूरी के लिए पहुंचे थे. लेकिन बाद में फिर उनसे संपर्क नहीं हो पाया. परिवार को आशंका है कि एनकाउंटर और इन तीनों के लापता होने में कोई संबंध हो सकता है.

शोपियां मुठभेड़ की होगी जांच (फाइल फोटो) शोपियां मुठभेड़ की होगी जांच (फाइल फोटो)
अशरफ वानी
  • श्रीनगर,
  • 10 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:59 PM IST

  • इल्तिजा मुफ्ती ने की मुठभेड़ पर जांच बिठाने की मांग
  • दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में जुलाई में हुई थी मुठभेड़
दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में पिछले महीने की 18 तारीख को हुई मुठभेड़ पर अब सवाल उठ रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इस मुठभेड़ पर जांच बिठाने की मांग की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'यह सुनकर हैरान हूं कि तीन लापता मजदूर कथित तौर पर शोपियां मुठभेड़ में मार गिराए गए. सशस्त्र बलों को खुली छूट दे दी गई है. स्पष्ट करें कि मृत शरीर को अंजान जगह पर सड़ने के लिए क्यों छोड़ा गया. शोपियां मुठभेड़ में जांच के आदेश दिए जाने चाहिए.

दरअसल जुलाई महीने में जम्मू-कश्मीर के शोपियां में एक एनकाउंटर हुआ था. इस एनकाउंटर में तीन आतंकियों को मार गिराया गया था. रविवार रात को राजौरी जिले के पीढ़ी गांव में एक परिवार ने कहा है कि जिस इलाके में यह एनकाउंटर हुआ, उसी इलाके में परिवार के तीन लोग लापता हो गए थे.

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परिवार का कहना है कि ये तीनों 17 जुलाई को दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में मजदूरी के लिए पहुंचे थे. इस बारे में उन्होंने अपने परिवार वालों को टेलीफोन कर जानकारी भी दी थी. लेकिन बाद में फिर उनसे संपर्क नहीं हो पाया. परिवार को आशंका है कि एनकाउंटर और इन तीनों के लापता होने में कोई संबंध हो सकता है.

परिवार के इस दावे के बाद आर्मी ने इस केस में जांच करवाने का फैसला किया है. अधिकारियों ने बताया कि 18 जुलाई 2020 को एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर ऑपरेशन से जुड़े जो भी इनपुट्स थे, उन्हें नोट कर लिया गया है. सभी तथ्यों पर ध्यान दिया जाएगा.

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इससे पहले सेना की तरफ से कहा गया था कि एनकाउंटर में जिन तीन आतंकियों को मारा गया था, उनकी पहचान नहीं हुई थी और तय प्रोटोकॉल के मुताबिक, उन्हें दफना दिया गया था.

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