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जम्मू में फारूक अब्दुल्ला के घर BJYM के कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता जम्मू के भठिंडी इलाके में स्थित फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. कार्यकर्ताओं ने इस घोटाले में लिप्त लोगों पर एक्शन की मांग की है. 

जम्मू के भठिंडी इलाके में स्थित घर के बाहर प्रदर्शन (पीटीआई) जम्मू के भठिंडी इलाके में स्थित घर के बाहर प्रदर्शन (पीटीआई)
सुनील जी भट्ट
  • जम्मू,
  • 26 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:47 AM IST
  • जम्मू-कश्मीर में सियासत गरमा गई है
  • घोटाले में लिप्त लोगों पर एक्शन की मांग
  • रोशनी जमीन घोटाले में कई नेता घिरे

जम्मू-कश्मीर में सियासत गरमा गई है. जिला विकास परिषद के चुनाव से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में रोशनी जमीन घोटाला उजागर होने के बाद कई बड़े राजनेता और अफसर घेरे में हैं. इस बीच बुधवार को जम्मू में पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. 

भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता जम्मू के भठिंडी इलाके में स्थित डॉ फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. कार्यकर्ताओं ने इस घोटाले में लिप्त लोगों पर एक्शन की मांग की है. 

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BJYM नेताओं ने जोर देकर कहा कि पिता और पुत्र के साथ-साथ उनके करीबियों ने जनता की जमीन को हड़प लिया है. प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने कहा कि अतिक्रमित भूमि पर बने घर को तत्काल ध्वस्त किया जाना चाहिए और भूमि को बहाल किया जाना चाहिए. BJYM अध्यक्ष अरुणदेव सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. 

क्या है रोशनी एक्ट?

रोशनी एक्ट प्रभावशाली लोगों द्वारा सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण को नियमित करने के लिए बनाया गया था. 2001 में, 'जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (व्यवसायियों का स्वामित्व का मामला) अधिनियम 2001' लोगों को राज्य भूमि के स्वामित्व के निहितार्थ प्रदान करने के लिए पारित किया गया था, जो ऐसी भूमि पर काबिज थे. इसी एक्ट की ओट में पूरे जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों एकड़ मूल्यवान वन और राज्य की भूमि पर अवैध रूप से प्रभावशाली राजनेताओं, व्यापारियों, नौकरशाहों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण और कब्जा कर लिया गया.

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रोशनी अधिनियम के तहत प्रस्तावित किया गया था कि वर्ष 1990 तक प्रचलित बाजार दर के बराबर लागत के भुगतान पर, 1990 तक अनाधिकृत रूप से राज्य की भूमि पर कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को मालिकाना हक दिया जाए. क्योंकि इन जमीनों को वापस ले पाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा था.

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