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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में महसूस किए गए भूकंप झटके, 4.1 थी तीव्रता

धरती की ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है. जहां भी ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती हैं वहां भूकंप का खतरा पैदा हो जाता है.

पहलगाम में भूकंप के झटके पहलगाम में भूकंप के झटके
aajtak.in
  • श्रीनगर,
  • 07 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:47 AM IST
  • जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में भूकंप के झटके
  • रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1
  • सुबह 4.29 मिनट पर महसूस किए गए भूकंप के झटके

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई है. पहलगाम में सुबह 4 बजकर 29 मिनट पर तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इस बात की पुष्टि की है. 

तड़के आए भूकंप के झटकों ने लोगों को हैरान कर दिया. नवंबर का महीना है और घाटी में तापमान में लगातार गिरावट आ रही है. ऐसे में सर्द रात के बीच तड़के भूकंप के झटके आए. हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है.  

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आइए जानते हैं क्या होती है भूकंप की वजह

धरती की ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है. जहां भी ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती हैं वहां भूकंप का खतरा पैदा हो जाता है. भूकंप तब आता है जब इन प्लेट्स एक दूसरे के क्षेत्र में घुसने की कोशिश करती हैं, प्लेट्स एक दूसरे से रगड़ खाती हैं, उससे अपार ऊर्जा निकलती है, और उस घर्षण या फ्रिक्शन से ऊपर की धरती डोलने लगती है. कई बार धरती फट तक जाती है, कई बार हफ्तों तो कई बार कई महीनों तक ये ऊर्जा रह-रहकर बाहर निकलती है और भूकंप आते रहते हैं, इन्हें आफ्टरशॉक कहते हैं.

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जितना ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आता है, उतना ही अधिक कंपन होता है. जैसे 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर जहां इमारतें गिर जाती हैं वहीं 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है.

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किसी भूकंप के समय भूमि के कंपन के अधिकतम आयाम और किसी आर्बिट्रेरी छोटे आयाम के अनुपात के साधारण गणित को 'रिक्टर पैमाना' कहते हैं. 'रिक्टर पैमाने' का पूरा नाम रिक्टर परिमाण परीक्षण पैमाना (रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल) है और लघु रूप में इसे स्थानिक परिमाण (लोकल मैग्नीट्यूड) है.

 

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