
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के खत्म होने के एक साल के बाद देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया चल रही है. परिसीमन की कवायद पूरी होते ही भारत जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसे में घाटी के छह राजनीतिक दलों ने सामूहिक रूप से एक साथ चलने और राज्य के विशेष दर्जे की बहाली जैसे अहम मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए 'गुपकार समूह' का गठन किया है, जिसे बीजेपी ने पाकिस्तान का एजेंडा बताया है.
जम्मू-कश्मीर के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने मंगलवार को विपक्षी पार्टियों द्वारा राज्य के विशेष दर्जा के बहाल के लिए गठित समूह की निंदा करते हुए कहा कि गुपकार एजेंडे के समर्थक, पाकिस्तान के समर्थक हैं. वे देश विरोधी एजेंडा लेकर चल रहे हैं और इलाके में खून खराबे के लिए जिम्मेदार हैं.
'गुपकार समूह'
बता दें कि 22 अगस्त 2020 को 6 पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, कांग्रेस, पीपल्स कॉन्फ़्रेंस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी और जम्मू-कश्मीर आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने फारूक अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित गुपकार रोड पर बने घर पर एक बैठक की. इस बैठक में इस अनौपचारिक गुट का गठन किया गया था, जिसे गुपकार समूह का नाम दिया गया है. इन पार्टियों ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए फिर से इसकी बहाली के लिए मिलकर संघर्ष करने का ऐलान किया था.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि भविष्य में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में उनका दल भाग लेगा या नहीं, इसका फैसला सामूहिक रूप से ही किया जाएगा. इसके अलावा राज्य के तमाम अहम मुद्दों पर इन सभी दल सामूहिक रूप से एक साथ चलने का फैसला किया है. जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के समूह का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा और वे दल केंद्र पर कितना दबाव डाल पायेंगे, यह अभी निश्चित रूप से कहना मुश्किल है?
हालांकि, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म करने से एक दिन पहले इन्हीं 6 पार्टियों ने 4 अगस्त, 2019 को गुपकार रोड के उसी घर पर एक बैठक की थी, जिसमें जम्मू-कश्मीर के संविधान, राज्य का विशेष दर्जा और पहचान बरकरार रखने पर फैसला लिया गया. इसके अगले ही दिन राज्य का विषेश दर्जा खत्म कर दिया गया और तमाम बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया या गिरफ़्तार कर लिया गया था.