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मुफ्ती विहीन जम्मू कश्मीर विधानसभा... इल्तिजा मुफ्ती हार गईं लेकिन साख बचा ले गए ये सियासी परिवार

जम्मू कश्मीर चुनाव में पीडीपी की ओर से इल्तिजा मुफ्ती की लॉन्चिंग फेल हो गई लेकिन उमर अब्दुल्ला समेत करीब दर्जनभर ऐसे नेता चुनावी वैतरणी पार कर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे हैं, जिनका सीधा नाता सियासी खानदान से है.

उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो) उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव में केंद्र शासित प्रदेश के कई सियासी खानदानों की साख दांव पर थी. मुफ्ती खानदान तीसरी पीढ़ी की चुनावी लॉन्चिंग कर रहा था तो वहीं कई परिवारों की अगली पीढ़ी भी मैदान में थी. चुनाव नतीजों के बाद जब तस्वीर साफ हुई, महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा की हार के साथ ये तय हो गया कि विधानसभा मुफ्ती परिवार विहीन होगी.

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख की बेटी इल्तिजा हार गईं लेकिन अब्दुल्ला परिवार समेत कई ऐसे सियासी खानदान भी हैं जो हालिया चुनाव में अपनी साख बचा ले गए. आइए, नजर डालते हैं ऐसे ही परिवारों और नवनिर्वाचित विधायकों पर.

उमर अबदुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. उमर अब्दुल्ला को नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट से निर्दल उम्मीदवार इंजीनियर राशिद से करारी मात के बाद उमर के साथ ही अब्दुल्ला परिवार के सियासी भविष्य पर भी सवाल उठ रहे थे.

उमर अब्दुल्ला ने दो विधानसभा सीटों, गांदरबल और बड़गाम से किस्मत आजमाई तो उसे बारामूला नतीजों का इफेक्ट बताया जा रहा था. उमर अब्दुल्ला दोनों सीट से चुनाव जीते हैं. उमर अब्दुल्ला के पिता डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला और दादा शेख अब्दुल्ला भी जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं.

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मियां मेहर अली

मियां मेहर अली कंगन विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर जम्म कश्मीर विधानसभा पहुंचे हैं. मियां मेहर अली, मियां अल्ताफ अहमद के बेटे हैं. मियां अल्ताफ अहमद अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट से सांसद हैं. मियां अल्ताफ ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को हराया था.

जफर अली खटाना

जफर अली खटाना जम्मू कश्मीर की कोकरनाग विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. जफर भी अनंतनाग सांसद मियां अल्ताफ के रिश्तेदार हैं. कोकरनाग सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. खटाना गुर्जर-बकरवाल समुदाय से आते हैं जिसे एसटी का दर्जा प्राप्त है. 

तारिक हमीद कर्रा

जम्मू कश्मीर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए तारिक हमीद कर्रा सेंट्रल शॉल्टेंग विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. 148 करोड़ की संपत्ति के मालिक कर्रा भी केंद्र शासित प्रदेश के रसूखदार सियासी खानदान से आते हैं. कर्रा के दादा गुलाम मोहिउद्दीन कर्रा की गिनती कभी नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रभावशाली नेताओं में होती थी. हालांकि, गुलाम मोहिउद्दीन कर्रा कभी सांसद-विधायक नहीं रहे.

सज्जाद लोन

जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन कुपवाड़ा और हंदवाड़ा, दो विधानसभा सीटों से चुनाव मैदान में उतरे थे. सज्जाद लोन कुपवाड़ा से हार गए लेकिन हंदवाड़ा का रण जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. सज्जाद लोन के पिता अब्दुल गनी लोन भी बड़े कश्मीरी नेताओं में गिने जाते थे. अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन ने चुनावी राजनीति से दूरी बना रखी थी. सज्जाद 2014 के विधानसभा चुनाव में भी विधानसभा पहुंचे थे और मुफ्ती सरकार में बीजेपी कोटे से मंत्री भी रहे थे.  

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हिलाल अकबर लोन

हिलाल अकबर लोन जम्मू कश्मीर की सोनवारी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. हिलाल जम्मू कश्मीर के कद्दावर नेता मोहम्मद अकबर लोन के बेटे हैं. मोहम्मद अकबर लोन जम्मू कश्मीर विधानसभा के स्पीकर भी रहे हैं. हालांकि, हिलाल अकबर लोन भी जम्मू कश्मीर की सियासत में कोई नया चेहरा नहीं हैं. हिलाल तीन बार के विधायक हैं.

सज्जाद शफी

सज्जाद शफी नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर बारामूला जिले की उरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं. सज्जाद शफी के पिता मोहम्मद शफी भी कश्मीर घाटी के मजबूत और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. मोहम्मद शफी नेशनल कॉन्फ्रेंस में मजबूत पकड़ रखते हैं. मोहम्मद शफी जम्मू कश्मीर सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे हैं.

इरशाद रसूल कर

इरशाद रसूल कर नेशनल कॉन्फ्रेंस से विधानसभा पहुंचे हैं. इरशाद रसूल कर सोपोर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. सोपोर विधायक इरशाद रसूल कर के पिता गुलाम रसूल की गिनती भी कभी घाटी में कांग्रेस के बड़े नेताओं में होती थी. गुलाम रसूल कर जम्मू कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे.

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बशीर अहमद वीरी

श्रीगुफारा-बिजबेहरा विधानसभा सीट पर विधानसभा चुनाव में दो सियासी परिवारों की साख दांव पर थी. मुफ्ती परिवार का लॉन्चिंग पैड मानी जाने वाली इस सीट से पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती चुनाव मैदान में थीं. इल्तिजा के सामने नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बशीर अहमद वीरी की चुनौती थी. वीरी ने इल्तिजा को चुनावी दंगल में पटखनी दे दी. नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक वीरी भी सियासी खानदान से आते हैं. वीरी के पिता अब्दुल गनी शाह वीरी भी जम्मू कश्मीर सरकार में मंत्री रहे हैं.

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शेख अहसान अहमद परदेसी

शेख अहसान अहमद परदेसी श्रीनगर की लाल चौक विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं. लाल चौक से जीते शेख अहसान अहमद पूर्व एमएलसी शेख गुलाम कादिर परदेसी के बेटे हैं. शेख गुलाम कादिर परदेसी जम्मू कश्मीर की सियासत में चर्चित शख्सियत हैं. गुलाम कादिर परदेसी के नाम की चर्चा जम्मू कश्मीर में दल-बदल के लिए अधिक होती है. कभी पीडीपी तो कभी नेशनल कॉन्फ्रेंस, गुलाम कादिर कई बार दल बदल चुके हैं.

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रफीक नायक

आतंक प्रभावित पुलवामा जिले की त्राल विधानसभा से महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली पीडीपी के रफीक नायक को जीत मिली है. रफीक नायक के पिता अली मोहम्मद नायक भी विधायक रहे हैं, जम्मू कश्मीर सरकार में मंत्री के साथ ही विधानसभा के स्पीकर भी रहे हैं. रफीक का मुकाबला नेशनल कॉन्फ्रेंस के सुरेंद्र सिंह चन्नी से था.

खुर्शीद अहमद शेख

आम चुनाव में बारामूला सीट से बतौर निर्दल उम्मीदवार दो लाख से अधिक वोट  के अंतर से जीते इंजीनियर राशिद की अगुवाई वाली अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) ने घाटी में जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. कभी लंगेट के दायरे तक सीमित मानी जाने वाली एआईपी केवल एक सीट जीत सकी और वह यही लंगेट. लंगेट से खुर्शीद अहमद शेख को जीत मिली है. खुर्शीद, इंजीनियर राशिद के भाई हैं.

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