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कश्मीरी पंडितों के मंदिर और तीर्थस्थलों की प्रॉपर्टी राज्य करेगा संरक्षित, हाईकोर्ट का आदेश

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मंदिरों और तीर्थस्थलों की संपत्तियों के संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि कश्मीरी हिंदू मंदिरों, तीर्थस्थलों को जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा संरक्षित किया जाए.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
सुनील जी भट्ट
  • जम्मू,
  • 11 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 9:27 PM IST

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मंदिरों और तीर्थस्थलों की संपत्तियों के संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि कश्मीरी हिंदू मंदिरों, तीर्थस्थलों को अब राज्य की ओर से संरक्षित किया जाए. ये ऐसे मंदिर या तीर्थस्थल होंगे जो अतिक्रमण की चपेट में हैं या भू-माफियाओं द्वारा टारगेट किए गए हैं या जिनका रखरखाव नहीं किया जा रहा है. 

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इस मामले में राज्य का प्रतिनिधित्व जम्मू-कश्मीर के सीनियर एडवोकेट वकील मोहसिन कादरी ने किया. वरिष्ठ वकील सीएम कौल ने वर्चुअल मोड के जरिए याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया. 

हाईकोर्ट की बेंच ने ऐसे मंदिरों और तीर्थस्थलों के संरक्षण से संबंधित सभी मामलों को एक साथ जोड़ दिया है, जिन्हें पिछले तीन दशकों में या तो बेचा गया या पट्टे पर दिया गया, जिनका अतिक्रमण किया गया, अनधिकृत रूप से कब्जा किया गया या कट्टरपंथी ताकतों की धमकी या अवैध धन से अंदरूनी लोगों, स्वयंभू महंतों, स्वयंभू पुजारियों के साथ मिलीभगत कर घाटी में करोड़ों की मंदिर संपत्ति हड़प ली. 

बेंच ने राज्य परिषद/वरिष्ठ एएजी द्वारा प्रस्तुत सबमिशन के आधार पर मंदिर और इसकी अचल संपत्तियों का संरक्षण राज्य/संबंधित जिलों के डीएम को सौंपने पर सहमति व्यक्त की है, जो कि उपद्रवियों से कब्जा लेंगे. चाहे वे अंदरूनी हों या बाहरी. 

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कोर्ट ने कहा कि राज्य को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह मंदिरों को अतिक्रमणों से मुक्त कराए और तीसरे पक्ष को अवैध रूप से बेची गई जमीन को वापस ले और मंदिर की स्थिति बहाल करे. साथ ही इसे देवता के नाम पर रखा जाना चाहिए. 

कोर्ट ने कहा कि ये सभी लेन-देन अवैध हैं, क्योंकि मंदिर की संपत्ति को कम से कम किसी तीसरे पक्ष को बेचा या दिया नहीं जा सकता है, जिस तरह से पिछले तीन दशकों से किया जाता रहा है. उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इन मामलों की सुनवाई शुरू कर दी है, जिनकी संख्या लगभग 100 है.

हाईकोर्ट के इस फैसले से सैकड़ों लंबित मामलों पर असर होगा. इस केस से जुड़े अन्य मामले की सुनवाई गुरुवार यानी 18 जुलाई को होगी. बता दें कि बुलबुल बाग बरजुल्ला श्रीनगर में मियां कयूम द्वारा प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा की गई संपत्तियां, जो वास्तव में हनुमान मंदिर की हैं, उस पर भी आगामी सप्ताह में कार्रवाई होने की संभावना है.

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