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J-K: LOC से 2 किमी दूर गांव में सेना की पहल से 50 जरूरतमंद महिलाएं हर रोज बना रहीं तिरंगा

लाइन ऑफ कंट्रोल से दो किलोमीटर दूर अखनूर के क्षेत्र में एक गांव है बुधवाल. जहां कुछ महीनों पहले सिर्फ खामोशी थी, लेकिन आज यहां की सर्द हवाओं में देशप्रेम की गर्माहट महसूस होती है. दरअसल, क्रॉस स्वॉर्ड्स डिविजन ऑफ इंडियन आर्मी ने बुधवाल में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की है. सेना ने अब तक इसी तरह की 50 से भी ज्यादा महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा है.

महिलाएं बना रहीं तिरंगा महिलाएं बना रहीं तिरंगा
तेजश्री पुरंदरे
  • जम्मू,
  • 13 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST
  • वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत
  • 50 से भी ज्यादा महिलाएं जुड़ीं

आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर घर तिरंगा अभियान जोरो पर है. आम आदमी से लेकर सरहद पर सुरक्षा के लिए तैनात जवान भी अपने देश की आन, बान, शान और अभिमान, यानि कि तिरंगे को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम में लगे हुए हैं.

लाइन ऑफ कंट्रोल से दो किलोमीटर दूर अखनूर के क्षेत्र में एक गांव है बुधवाल. जहां कुछ महीनों पहले सिर्फ खामोशी थी, लेकिन आज यहां की सर्द हवाओं में देशप्रेम की गर्माहट महसूस होती है. दरअसल, क्रॉस स्वॉर्ड्स डिविजन ऑफ इंडियन आर्मी ने बुधवाल में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की है. 

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50 से भी ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
इसके तहत उन्होंने इस गांव के महिलाओं को हर घर तिरंगा अभियान से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है. दरअसल,यह गांव की वो महिलाएं हैं जो अपने पैरों पर खड़े होकर अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहती हैं. इन्हीं महिलाओं को सशक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस वोकेशनल ट्रेनिंग की शुरुआत की गई. सेना ने अब तक इसी तरह की 50 से भी ज्यादा महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा है. 

एक हज़ार से भी ज्यादा तिरंगा बना चुकीं
इससे पहले इन्हें कुछ दिनों की ट्रेनिंग दी गई और अब यह पिछले दस दिनों से तिरंगे बना रही हैं. अब तक यह महिलाएं एक हज़ार से भी ज्यादा तिरंगा बना चुकी हैं. इन तिरंगों को सेना की विभिन्न बटालियन और कार्यस्थल पर  लगाया गया है. साथ ही साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस मुहिम में जोड़ने के लिए लोगों को भी अपने घर पर तिरंगा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. 

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क्रॉस स्वॉर्डस ऑफ डिविजन ऑफ इंडियन आर्मी की इस पहल से देशप्रेम की भावना तो प्रबल हो ही रही है लेकिन साथ ही साथ जरूरतमंद महिलाएं आत्मनिर्भर बन रोजगार भी पा रही हैं. 

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