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J-K: ड्रोन और PAK टेलीकॉम से कैसे निपटें? सुरक्षा के नए खतरों पर मैराथन मीटिंग

जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले और पाकिस्तान टेलिकॉम के भारत में आने वाले सिग्नल पर चर्चा के लिए दो मीटिंग्स हुईं. बता दें कि 27 जून को हुए ड्रोन हमले के बाद भी जम्मू कश्मीर में अलग-अलग मौकों पर ड्रोन देखे गए थे.

जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा फोर्स अलर्ट जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा फोर्स अलर्ट
कमलजीत संधू
  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 9:47 AM IST
  • जम्मू कश्मीर पर चर्चा के लिए दो हाई लेवल मीटिंग हुई
  • पहली मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने की

जम्मू स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर हुए दो ड्रोन धमाकों (Drone attack jammu) के बाद जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक हलचल है. मंगलवार को भी ड्रोन हमले और पाकिस्तान टेलीकॉम के भारत में आने वाले सिग्नल पर चर्चा के लिए दो मीटिंग्स हुईं. पहली हाई लेवल मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने की. इसमें ड्रोन हमले पर बात हुई. 

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सूत्रों ने बताया कि दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक में हुई इस मीटिंग में एयर फोर्स स्टेशन पर हुए दो ड्रोन हमलों पर बात हुई. इनके पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ माना जा रहा है. 27 जून को हुए ड्रोन हमले के बाद भी जम्मू कश्मीर में अलग-अलग मौकों पर ड्रोन देखे गए थे. मीटिंग में जम्मू कश्मीर डीजीपी दिलबाग सिंह, एडीजी जम्मू मुकेश सिंह और आईबी चीफ अरविंद कुमार भी शामिल थे. 

सीमा को अधिक सुरक्षित बनाने पर हो रहा काम

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना सिर्फ बचाव के उपायों पर काम नहीं कर रही है, बल्कि 3 हजार किलोमीटर की पाकिस्तान से लगी सीमा को और अधिक सुरक्षित बनाने के रास्ते तलाश रही है. दिलबाग सिंह ने मीटिंग में कई मुद्दों को उठाया. इसमें जम्मू कश्मीर की जेल में सुरक्षा, युवाओं के माइंडवॉश का मुद्दा भी शामिल था. इसके साथ-साथ ड्रोन हमले के नए खतरे पर भी बात हुई.

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दूसरी मीटिंग पाकिस्तान टेलीकॉम और इंटरनेट सिग्नल्स पर थी जो जम्मू कश्मीर में रिसीव किए जाते हैं. इसमें जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकियों द्वारा पाकिस्तान की सिम कार्ड इस्तेमाल करने पर भी चिंतन हुआ. कुछ ऐसे तकनीकी समाधानों पर विचार किया जा रहा है जिसमें बॉर्डर पार से आने वाले ऐसे सिग्नल्स को ब्लॉक किया जा सके. कई एक्टिव ओवरग्राउंड वर्कर्स या सहयोगियों के एनकाउंटर के बाद उनके पास से पाकिस्तान की सिम कार्ड मिली हैं.

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