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J-K: ‘गुपकार’ मंथन के बाद अब BJP नेताओं की बैठक, धार्मिक संगठन के प्रतिनिधि भी शामिल

जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं की बैठक शुरू हो गई है. करीब सौ से अधिक नेता, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हैं. 

जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेता कर रहे हैं बैठक (फाइल फोटो) जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेता कर रहे हैं बैठक (फाइल फोटो)
सुनील जी भट्ट
  • जम्मू,
  • 16 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST
  • जम्मू-कश्मीर में बढ़ी राजनीतिक हलचल
  • गुरुवार को हुई गुपकार समझौते पर बैठक
  • विपक्ष के कई नेता बैठक में हुए शामिल
  • आज भाजपा ने बुलाई है बड़ी बैठक

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है. गुरुवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की अगुवाई में कश्मीर के विपक्षी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें अनुच्छेद 370 की वापसी की मांग की गई और गुपकार समझौते पर मंथन के साथ ही एक साझा संगठन बनाने की बात सामने आई. अब इस हलचल के बीच आज भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी बैठक बुला ली है. 

जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं की बैठक शुरू हो गई है. करीब सौ से अधिक नेता, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हैं. 

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ये बैठक विपक्ष की बैठक के तुरंत बाद हो रही है, ऐसे में इसमें भाजपा अपनी रणनीति पर फोकस करेगी. बैठक में बीजेपी के रविंदर रैना, कविंदर गुप्ता, निर्मल सिंह, अशोक कौल शामिल हैं. इसके अलावा पार्टी की ओर से धार्मिक संगठनों के प्रमुखों को भी बुलाया गया है. 

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गुपकार समझौते की बैठक में क्या हुआ?

नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने इस बैठक को बुलाया था, जिसमें उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन और अन्य नेता पहुंचे थे. गुपकार समझौता वो एक साझा बयान है जो 4 अगस्त 2019 को इन पार्टियों ने जारी किया था और राज्य में अनुच्छेद 370, 35ए की वापसी की मांग की थी. 

अब गुरुवार को बैठक के बाद सभी पार्टियों ने एक नए गठबंधन की घोषणा कर दी है. जिसे पीपुल्स अलाइंस कहा गया है, इसका फोकस भी गुपकार समझौते को लागू करना ही है.

इस बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम महबूबा मुफ्ती को 14 महीने बाद हुई उनकी रिहाई के लिए बधाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं. हमने इस गठबंधन को गुपकार घोषणा कहने का फैसला किया है. हम भारत सरकार से राज्य के लोगों का अधिकार वापस मांगते हैं. जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे को हल करने की जरूरत है. हम सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग करते हैं. हम फिर से मिलेंगे और एक रणनीति तैयार करेंगे.

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया था, साथ ही प्रदेश का बंटवारा करके केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया. इसके बाद कई राजनेताओं को नज़रबंद करके रखा था, जिन्हें अब रिहा किया गया है.

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