
जम्मू-कश्मीर के लिए एक बड़ा दिन आ रहा है. यहां दस साल बाद सरकार का गठन होने जा रहा है. हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने चुनाव जीता है और उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनने वाले हैं. वह शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सेंटर में डल लेक के किनारे शपथ लेंगे. यह समारोह सिर्फ जम्मू-कश्मीर और अब्दुल्ला परिवार के लिए अहम नहीं है, बल्कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए भी खास मौका है.
हरियाणा में हालिया चुनावी परिणामों के बाद, कांग्रेस इस मौके को गठबंधन की एकता और शक्ति को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर मान रही है. कांग्रेस के मुताबिक, सभी 'इंडिया' गठबंधन के प्रमुख नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है. इस कदम का उद्देश्य पार्टी की एकजुटता और मजबूत मौजूदगी को दिखाना है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी को हरियाणा की हार से उबरना बाकी है.
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विपक्ष के इन बड़े नेताओं को भेजा गया निमंत्रण
इनवाइटी लिस्ट में कई प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं, जैसे राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, शरद पवार, अखिलेश यादव, लालू प्रसाद यादव, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन, महबूबा मुफ्ती, भगवंत मान, और अरविंद केजरीवाल के नाम शामिल हैं. इनके अलावा, अन्य प्रमुख नेताओं की भी इस समारोह में मौजूदगी रहेगी.
अब्दुल्ला सरकार में कांग्रेस की क्या रहेगी हिस्सेदारी?
उमर अब्दुल्ला की सरकार में कांग्रेस की हिस्सेदारी अभी तय नहीं हुई है. सूत्रों की मानें तो, कांग्रेस ने दो मंत्रालयों की मांग की थी, लेकिन नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) ने सिर्फ एक मंत्रालय देने का प्रस्ताव दिया है. एनसी गठबंधन सरकार में एक बड़े भागीदार के रूप में स्पष्ट तौर पर अपनी शर्तें रख चुकी है.
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हालांकि, कांग्रेस इस समय बड़े चित्र को देख रही है और 'इंडिया' गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ताकत बनाने के लिए तैयारी में है, ताकि अगामी महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी जा सके.