
पुलवामा हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दायर चार्जशीट में नया खुलासा हुआ है. एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि पाकिस्तान के बहावलपुर से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर, हमले को अंजाम देने वाले आतंकी उमर फारूख को वॉयस मैसेज भेज कर लगातार निर्देश दे रहा था.
एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक मसूद अजहर के साथ ही उसके दोनों भाई रउफ असगर और अम्मार अल्वी भी लगातार जैश आतंकी उमर फारूख के संपर्क में थे. गौरतलब है कि उमर फारूख को इस साल मार्च महीने में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था. उमर फारूख आतंकी मसूद अजहर का भतीजा बताया जाता है. उमर फारूख को उसके पाकिस्तानी नंबर( +92***99 और +92**22) पर अम्मार अल्वी अपने नंबर +92311** और +92,3113**** से वॉयस मैसेज के जरिए हमले के संबंध में लगातार निर्देश दे रहा था.
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उमर फारूख इसी नंबर पर सेल्फी और विस्फोटक की तस्वीरें भी लेकर भेजता था. इस मोबाइल को जब एनआईए ने जब्त किया तो उसको मसूद अजहर की इस साजिश के संबंध में चौंकाने वाली जानकारी मिली. एनआईए सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उमर फारूख और आतंकी कामरान अपने ग्रुप में चैटिंग और वॉयस मैसेज करके ये बात कर रहे थे कि फिदायीन हमला करो और इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो जाएगा. इससे हम अपने सभी आतंकियों की कश्मीर घाटी में घुसपैठ करवा लेंगे.
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एनआईए सूत्रों की मानें तो उमर फारूख ने 100 से ज्यादा वॉट्सएप कॉल कर अपने चाचा अम्मार अल्वी और अब्दुल रउफ से बातचीत की. पुलवामा हमले के लिए जैश आतंकी कई बैच में करीब 35 से 40 किलो आरडीएक्स लेकर आया था. जम्मू के इंटरनेशनल बॉर्डर के उस पार शकरगढ़ लॉन्च पैड से जैश के आतंकियों की घुसपैठ कराई गई. घुसपैठ के लिए आतंकियों ने टनल का इस्तेमाल किया था.
कश्मीर में बनाया विस्फोटक
पाकिस्तान से लाए गए आरडीएक्स का इस्तेमाल कर कश्मीर में मौजूद आतंकियों ने विस्फोटक बनाया. इसके लिए आतंकियों ने अमोनियम नाइट्रेट, जिलेटिन की छड़, एल्यूमिनियम पाउडर का इस्तेमाल किया था. एनआईए सूत्रों ने बताया कि जैश के आतंकी पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में इसी के जैसा एक और हमला करना चाहते थे. पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक होने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण आतंकियों के आकाओं ने एक और हमला करने से रोक दिया था.