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पोस्ट मार्टम के लिए मां के शव को रिक्शे से अस्पताल लेकर पहुंचे बेटी और दो बेटे, बोले- एंबुलेंस नहीं मिली

मां के शव को पोस्ट मार्टम होना था. प्रशासन ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई तो बच्चे शव को रिक्शे में रखकर अस्पताल ले गए. बेटी और दो बेटे शव को ले जाते दिखे. घटना का वीडियो भी सामने आया है. अब मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच कराने की बात कही है.

मां के शव को पोस्ट मार्टम के लिए ले जाते बच्चे मां के शव को पोस्ट मार्टम के लिए ले जाते बच्चे
aajtak.in
  • गुमला,
  • 09 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST

झारखंड (Jharkhand) के गुमला में तीन बच्चे अपनी मां के शव को रिक्शे पर रखकर अस्पताल लेकर पहुंचे. पुलिस और प्रशासन ने एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई और शव को पोस्ट मार्टम के लिए अस्पताल ले जाने का फरमान सुना दिया था. अब मामले ने तूल पकड़ा है.

गुमला के सदर थाना क्षेत्र के कुम्बाटोली में रहने वाली 60 साल की लीलो देवी की सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल की ओर से परिजनों के एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई.

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महिला के शव के साथ परिजन

फिर परिवार द्वारा 500 रुपए देकर प्राइवेट एंबुलेंस के जरिए लीलो देवी के शव को घर लाया गया. कुछ ही देर बाद पुलिस मृतक महिला के घर पहुंची और पोस्ट मार्टम के लिए शव को दोबारा अस्पताल ले जाने की बात करने लगी.

पुलिस का कहना था कि महिला से मारपीट हुई थी. जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अब उसकी मौत हो गई है इसलिए पोस्ट मार्टम होगा. उसके बाद शव को परिवार को सौंप दिया जाएगा.

पुलिस ने लीलो देवी के परिवार को शव सदर अस्पतला ले जाने का फरमान तो सुना दिया लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई. पुलिस के डर से बेटी और दो बेटे अपनी मां की डेड बॉडी को रिक्शे में रखकर अस्पताल की ओर चल दिए. घर से अस्पताल की दूरी चार किमी थी.रास्ते भर आंखों में आंसू लिए बेबस बच्चे शव को लेकर चलते रहे. 

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मामले का वीडियो सामने आने पर वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह सूचना पहुंची. उनका कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है. दो भी दोषी है उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

मरीज को लेकर 12 किमी चले थे परिजन

झारखंड के ही साहिबगंज जिले में महिला मरीज को एंबुलेंस नहीं मिली थी. गंभीर बीमार महिला को उसके परिजन खाट पर लेटाकर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. इस दौरान परिजनों ने बारह किमी का सफर तय किया था. उन्होंने बताया था कि जब  108 पर फोन लगाकर एंबुलेंस भेजने की बात कही तो मना कर दिया गया था. विवश होकर खाट पर लेटाकर मरीज को अस्पताल लाए थे.

पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले

अलग-अलग शहरों से इस तरह के कई मामले सामने आए हैं. जिनमें मरीज की अस्पताल में मौत होने के बाद शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. वाहन नहीं मिलने के कारण परिजन शव को ठेले, ई-रिक्शा, बाइक और कंधे पर ले जाते दिखे थे.

 

 

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