
झारखंड में बिजली की स्थिति बदहाल है. राज्य में तेनुघाट(TVNL) की एक यूनिट को छोड़कर किसी भी पावर प्लांट में से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है. राज्य में 2100 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 130 मेगावट बिजली का हो रहा है. ग्रामीण इलाकों में जहां 5 घंटे बिजली सप्लाई हो रही है तो वहीं राजधानी रांची में सिर्फ 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है.
झारखंड बिजली वितरण निगम करीब 370 करोड रुपए की बिजली प्रतिमाह खरीद रहा है. बावजूद इसके लोगों को बिजली की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है. बिजली आपूर्ति करने के लिए ट्रांसमिशन लाइन नहीं है. झारखंड राज्य बनने के बाद से ही अंडरग्राउंड केबलिंग का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है.
निगम को भी लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है. हाल ये है कि झारखंड के कई जिलों में बिजली के लिए दूसरे राज्यों का मुंह देखना पड़ रहा है. गढ़वा जिला आज भी बिजली के लिए उत्तर प्रदेश पर निर्भर है. संथाल परगना की स्थिति भी लगभग यही है. यहां पूरी व्यवस्था बिहार और NTPC के पावर प्लांट पर टिकी है. इसे ललमटिया और पतरातू से जोड़ने का काम आज तक नहीं हो सका है.
सीसीएल का बकाया 212 करोड़
TVNL की ओर से हर माह झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को तकरीबन 80 करोड़ रुपए की बिजली दी जाती है. जबकि इसके एवज में उसे सिर्फ 45 करोड़ का ही भुगतान हो पा रहा है. वहीं सीसीएल से TVNL प्रति माह करीब 50 करोड़ का कोयला खरीदता है. बिजली वितरण निगम द्वारा केवल 45 करोड़ ही दिए जाने की वजह से सीसीएल को TVNL की ओर से पूरी राशि नहीं दी जा सकी है. इस वजह से सीसीएल का बकाया बढ़कर 212 करोड़ का हो चुका है.