Advertisement

रामनवमी पर झारखंड में बिजली कटौती को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, जानें- क्या है वजह

ये प्रथा तब शुरू हुई, जब 2000 के दशक की शुरुआत में एक धार्मिक जुलूस के दौरान झंडों के हाई-टेंशन तारों को छूने से 29 लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद सरकार ने सुरक्षा उपाय के रूप में राम नवमी और मुहर्रम के दौरान बिजली कटौती की नीति अपनाई.

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को रामनवमी पर बिजली आपूर्ति बंद रखने की अनुमति दी सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को रामनवमी पर बिजली आपूर्ति बंद रखने की अनुमति दी
अनीषा माथुर
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को राम नवमी के दिन बिजली आपूर्ति बंद करने की अनुमति दी, ताकि धार्मिक जुलूसों के दौरान करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके. ये फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि लंबे झंडे और ध्वज हाई-टेंशन तारों के संपर्क में आ सकते हैं, जिससे हादसे हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा, झारखंड सरकार को जुलूस में इस्तेमाल होने वाले ध्वजों की ऊंचाई को सीमित करने का निर्देश दिया गया है.

Advertisement

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने झारखंड सरकार से सवाल किया कि लोग इतनी देर तक बिना बिजली के कैसे रहेंगे? आप झंडों की ऊंचाई क्यों नहीं घटा सकते? यह सवाल तब उठा जब झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसने बिजली कटौती पर प्रतिबंध लगाया था. इस बेंच में न्यायमूर्ति संजय कुमार और के. वी. विश्वनाथन भी शामिल थे.

ये प्रथा तब शुरू हुई, जब 2000 के दशक की शुरुआत में एक धार्मिक जुलूस के दौरान झंडों के हाई-टेंशन तारों को छूने से 29 लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद सरकार ने सुरक्षा उपाय के रूप में राम नवमी और मुहर्रम के दौरान बिजली कटौती की नीति अपनाई. इस वर्ष सरकार ने 6 अप्रैल (राम नवमी) और जुलाई (मुहर्रम) में बिजली कटौती की योजना बनाई है.

Advertisement

गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट ने इस प्रथा की आलोचना करते हुए सरकार को जुलूस में इस्तेमाल होने वाले ध्वज स्तंभों की ऊंचाई निर्धारित करने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि आयोजकों को पूर्व सूचना दी जाए कि तय लिमिट से ऊंचे झंडे या ध्वज स्तंभ ले जाने की अनुमति नहीं होगी. इस आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की.

झारखंड सरकार की दलील और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने झारखंड सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि हाईकोर्ट का आदेश लागू करना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि हजारों लोग इन जुलूसों में भाग लेते हैं और अपने स्वयं के झंडे और पोल लाते हैं. उन्होंने कहा कि यह पिछले 20 वर्षों से हो रहा है, लेकिन अब तक किसी ने शिकायत नहीं की. रामनवमी रविवार को है, ऐसे में इस आदेश को इतने कम समय में लागू करना असंभव है.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिजली कटौती से अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर मुख्य लाइन बंद कर दी गई तो अस्पतालों का क्या होगा? अगर अस्पतालों को बिजली मिलती रहेगी, तो मुख्य लाइनें चालू रखनी होंगी. ऐसे में यदि झंडे के खंभे मुख्य लाइनों को छूते हैं, तो यह एक गंभीर समस्या बन जाएगी.

Advertisement

सरकार को देना होगा हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement