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Bokaro: पंचायत के फरमान पर बेटे ने 5 साल तक मां-बाप को कमरे में रखा कैद, बेटी ने छुड़वाया

बालीडीह थाना क्षेत्र निवासी शंभू महतो बोकारो स्टील प्लांट से रिटायर्ड कर्मचारी हैं. शंभू महतो के चार बेटे और एक बेटी है. बताया गया है कि 2014 में शंभू महतो के छोटे बेटे अनु कुमार ने अंतरजातीय विवाह कर लिया. इस विवाह का समाज के लोगों ने विरोध किया. इस बीच बालीडीह में एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें मुखिया पति हरीश महतो के साथ गांव के तमाम प्रबुद्धजन शामिल हुए.

बेटे के अंतरजातीय विवाह का समर्थन करना पड़ा महंगा. बेटे के अंतरजातीय विवाह का समर्थन करना पड़ा महंगा.
aajtak.in
  • बोकारो ,
  • 08 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST
  • बेटे के अंतरजातीय विवाह का समर्थन करना पड़ा महंगा
  • पंचायत ने सुनाया था सामाजिक बहिष्कार का फरमान
  • माता-पिता को कमरे में कैद कर रखता था छोटा बेटा

झारखंड के जिला बोकारो में कलयुगी बेटे ने अपने बुजुर्ग मां-बाप के साथ जो किया, वो बेहद ही दर्दनाक है. जिस बेटे के अंतरजातीय विवाह का समर्थन बुजुर्ग दंपति ने किया, उसी बेटे ने पंचायत के फरमान के बाद उन्हें कमरे में बंद कर दिया. इतना ही नहीं बुजुर्ग दंपति को भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था. पांच साल से एक अंधेरे कमरे में जीवन काट रहे पिता को पैरालिसिस हो गया, जबकि मां भी जीवन के अंतिम क्षण गिन रही थी. इस बीच बेटी ने अपने मां-बाप की सुध ली और पुलिस की सहायता से दोनों को मुक्त कराया. 

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बालीडीह थाना क्षेत्र निवासी शंभू महतो बोकारो स्टील प्लांट से रिटायर्ड कर्मचारी हैं. शंभू महतो के चार बेटे और एक बेटी है. बताया गया है कि 2014 में शंभू महतो के छोटे बेटे अनु कुमार ने अंतरजातीय विवाह कर लिया. इस विवाह का समाज के लोगों ने विरोध किया. इस बीच बालीडीह में एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें मुखिया पति हरीश महतो के साथ गांव के तमाम प्रबुद्धजन शामिल हुए.

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इस पंचायत में फरमान जारी किया गया कि अंतरजातीय विवाह करने वाले अनु कुमार के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाये. साथ ही ये भी कहा गया कि जो भी इस परिवार से संबंध रखेगा, उसका भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया जायेगा. पंचायत के इस फरमान के बाद बुजुर्ग दंपति के तीन बेटे सामाजिक बहिष्कार के डर से उनसे दूर हो गये. वहीं बुजुर्ग दंपति ने अपने छोटे बेटे अनु कुमार के साथ रहने का निर्णय कर लिया. 

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बताया गया है कि कुछ दिन तक तो अनु कुमार ने उनकी अच्छी तरह देखभाल की, लेकिन बाद में पंचायत के दबाव में आकर उसने अपने बुजुर्ग मां-बाप को एक कमरे में बंद कर दिया. इस कमरे में बिजली का कनेक्शन भी नहीं था. उन्हें भरपेट खाना भी नहीं दिया जा रहा था. इस बीच बुजुर्ग शंभू महतो को पैरालिसिस हो गया. वहीं वृद्ध मां की तबियत भी खराब रहने लगी थी.

बुजुर्ग दंपति की बेटी को जब मां की याद आई, तो वह उनसे मिलने घर पहुंच गई. यहां पर अपने मां-बाप की ऐसी हालत देख उसने पुलिस की मदद ली. बालीडीह थाने के इंचार्ज विनोद कुमार के पास पहुंची बुजुर्ग दंपति की बेटी बीना कुमारी ने पूरा मामला बताया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग दंपति को कमरे से आजाद कराया. 

इस मामले में वृद्ध दंपति के बेटे अनु का कहना है कि उसके अपने माता-पिता का खूब ध्यान रखा, लेकिन लॉकडाउन में आर्थिक स्थिति खराब हो जाने की वजह से वो भी परेशान हो गया था. वहीं मुखिया पति हरीश महतो ने सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में गांव की मुखिया और उनकी कोई भी अहम भूमिका नहीं है. अंतरजातीय विवाह का विरोध समाज के द्वारा किया जा रहा था.

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पंचायत में पूरे समाज का ये फैसला था, उनका अकेले का नहीं. वहीं बालीडीह थाना प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि इस मामले में जांच की जा रही है. पंचायत का फैसला मायने नहीं रखता है. इसमें सबसे ज्यादा गलती छोटे बेटे की है, जिसने अपने मां -बाप को घर में कैद करके रखा. यदि पंचायत का कोई दबाव था, तो उसे पुलिस से शिकायत करनी चाहिए थी.

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