
Indian Railway, Longest Flyover : मध्य प्रदेश के कटनी में देश का सबसे लंबा रेल फ्लाई ओवर बनाया जा रहा है. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल में कटनी बीना रेल खंड पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण हो रहा है. जिससे मालगाड़ियों के निर्बाध परिचालन में गति आएगी और समय की बचत भी होगी. इस ग्रेड सेपेरेटर से बिलासपुर ,सिंगरौली और बीना रेलखंड पर मालगाड़ियों को कटनी में स्टेशनों के ऊपर ही ऊपर सुगमता से निकाला जा सकेगा.
रेलवे के इस ओवरब्रिज को "उड़ता जंक्शन" के नाम से पहचाना जाने लगा है , हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे कटनी ग्रेड सेपेरेसन का नाम दिया गया है. यह ओवर ब्रिज मालगाड़ियों को गति देने के लिए कटनी बीना रेलखंड पर बिछाई गई थर्ड लाइन पर बनाया जा रहा है. इस ओवर ब्रिज में अप और डाउन का रेलवे ट्रेक है जिससे गुड्स ट्रेनों की आवाजाही होगी.
अप लाइन पर 16.08 किलोमीटर और डाउन लाइन पर 18.01 किलोमीटर लंबा रेल ओवर ब्रिज बन रहा है. रेलवे का यह मेगा प्रोजेक्ट 1247 करोड़ की लागत से इरकॉन कंपनी के प्रयास से तैयार किया जा रहा है. ओवर ब्रिज 673 पिलर के ऊपर बनाया जा रहा है. यह प्रोजेक्ट 2016 में स्वीकृत हुआ था और परियोजना का कार्य दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाने की संभावना है.
प्रतिदिन सैकड़ो मालगाड़ी गुजरती हैं
कटनी से प्रतिदिन गुजरने वाली सैकड़ो गुड्स ट्रेनों में ज्यादातर कोयला लेकर बिलासपुर और सिंगरौली की ओर से आती हैं. इन मालगाड़ियों को न्यू कटनी जंक्शन (NKJ) और कटनी मुड़वारा जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है. जिससे ट्रेन कई-कई घंटे लेट हो जाती हैं और रेलवे को डेमरेज देना पड़ता है. कटनी में रेल फ्लाई ओवर बन जाने से बिलासपुर , सिंगरौली और बीना रेलखंड पर मालगाड़ियों के परिचालन को गति मिलेगी.
उड़ता जंक्शन नाम कैसे पड़ा
इस ब्रिज को उड़ता जंक्शन कहने के पीछे भी अनोखी वजह है. देश के सबसे बड़े ग्रेड सेपरेटर में एक अपलाइन झलवारा से आएगी जबकि दूसरी लाइन कटंगी से आएगी. इन दोनों लाइनों को ब्रिज में बिमरौल नदी के पास पड़रिया में स्थापित किये जाने वाले जंक्शन में मिलाया जाएगा. बिलासपुर और सिंगरौली दोनों ही दिशाओं से आने वाली मालगाड़ी यहां रेल ओवर ब्रिज पर बनने जा रहे जंक्शन से एक ट्रेक पर आगे बढ़ेगी. पड़रिया में बनने वाले जंक्शन के कारण ही इसे उड़ता जंक्शन कहा जा रहा है.
(कटनी से अमर ताम्रकार के इनपुट के साथ)
ये भी पढ़ें -