
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में नगर निकायों के अलावा कुछ सीटों पर हुए विधानसभा उप-चुनावों में जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है, उनमें से एक है अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जैतहरी नगर परिषद का चुनाव भी शामिल है. आकलन के मुताबिक गत उप-चुनावों में भाजपा का जहां जनाधार घटा है वे आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं. इस लिहाज से अगले विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित अनूपपुर सीट सत्ताधारी पार्टी के लिए चुनौती साबित हो सकती है.
अनूपपुर विधानसभा सीट से 2013 के चुनाव में भाजपा के रामलाल रौतेला कुल 1,61,978 वोटों में से 57,438 यानी 48.88 फीसदी मत पाकर चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. जबकि कांग्रेस के बिसाहूलाल साहू को 45,693 वोट मतलब 38.89 फीसदी मत मिले थे. 1977 में बनी इस सीट पर सबसे अधिक बार बिसाहूलाल साहू ही विधायक रहे हैं जबकि पहली बार यहां से 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जुगल किशोर गुप्ता चुनकर विधानसभा पहुंचे थे.
अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र से 2008 में कांग्रेस के टिकट पर बिसाहूलाल साहू विधायक बने थे. वह इस सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं. अब जबकि भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का डर सता रहा है तो कांग्रेस इस आदिवासी बहुल इलाके से फिर जीत की कहानी लिखने की तैयारी में जुट गई है. एक आकलन के मुताबिक मध्य प्रदेश में जहां भाजपा का जनाधार घटा है वे ज्यादातर क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य हैं. इस स्थिति में कांग्रेस जीत के सपने देख रही है.