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महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन के पूजा से जुड़े 8 सुझावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को 8 सुझावों पर अमल करने को हरी झंडी दी. इससे पहले अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन आई थी.

महाकाल मंदिर (फाइल फोटो) महाकाल मंदिर (फाइल फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST
  • महाकाल मंदिर प्रबंधन ने दिए थे 8 सुझाव
  • सुप्रीम कोर्ट ने 8 सुझावों को दी हरी झंडी
  • सिर्फ शिवलिंग की सुरक्षा पर SC का फैसला

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को 8 सुझावों पर अमल करने को हरी झंडी दी. इससे पहले अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन आई थी. आज जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला सुनाया.
 
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को 8 सुझावों पर अमल करने को हरी झंडी दी. इसके अनुसार, शिवलिंग पर श्रद्धालु 500 ML से ज्यादा जल नहीं चढाएंगे. जल सिर्फ RO का होगा. भस्म आरती के दौरान शिवलिंग को सूखे सूती कपड़े से पूरा ढका जाएगा. अभी तक 15 दिनों के लिए आधा ढका जाता था. 

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सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, अभिषेक के लिए हर श्रद्धालु को 1.25 लीटर दूध या पंचामृत चढ़ाने की इजाजत होगी. शिवलिंग पर शुगर पाउडर लगाने की इजातत नहीं होगी, बल्कि देसी खांडसारी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. नमी से बचाने के लिए गर्भ गृह में ड्रायर व पंखे लगाए जाएंगे. 

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, बेल पत्र व फूल पत्ती शिवलिंग के ऊपरी भाग पर ही चढ़ाए जाएंगे, ताकि शिवलिंग के पत्थर को प्राकृतिक सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो. शाम पांच बजे के बाद अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग की पूरी सफाई होगी और इसके बाद सिर्फ सूखी पूजा होगी. अभी तक सीवर के लिए चल रही पारंपरिक तकनीक ही चलती रहेगी क्योंकि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के बनने में लंबा समय लगेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ASI, जियोलाजिकल और याचिकाकर्ता से आपत्ति या सुझाव भी मांगे थे. इसके बाद जब अगली सुनवाई नवम्बर 2018 के आखिरी हफ्ते में हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति को तुरंत वो नोटिस बोर्ड हटाने को कहा, जिसमें लिखा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूजा के नए नियम बनाए गए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये आदेश कभी नहीं दिया कि धार्मिक अनुष्ठान कैसे किए जाएं और ना ही ये कहा कि भस्म आरती कैसे हो. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि कोर्ट को मंदिर और पूजा के रीति रिवाजों से कोई लेना देना नहीं है. कोर्ट ने ये मामला सिर्फ शिवलिंग की सुरक्षा के लिए सुना और एक्सपर्ट कमेटी बनाई.

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंधन समिति ने ये प्रस्ताव पेश किए थे. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में मीडिया गलत रिपोर्टिंग करता है या पक्षकार मीडिया में गलत बयानी करता है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी.

 

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