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MP: भोपाल में किडनी ट्रांसप्लांट कर बचाई मरीज की जान, ग्रीन कॉरिडोर से 15 मिनट में तय की 23 किमी की दूरी

भोपाल में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. इस दौरान एंबुलेंस ने 23 किलोमीटर की दूरी 15 मिनट में तय की. आननफानन में मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की गई. इस तरह प्रदेश की राजधानी में मरीज की जान बचाई गई.

भोपाल में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीज की जान बचाई भोपाल में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीज की जान बचाई
रवीश पाल सिंह
  • भोपाल ,
  • 30 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 12:32 AM IST
  • शाम को 4:20 से 4:35 बजे तक बनाया कॉरिडोर
  • ब्रेन डेड मरीज़ की किडनी ट्रांसप्लांट की गई

भोपाल में शनिवार को एक मरीज की जान बचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. इसके लिए एंबुलेंस ने 23 किलोमीटर की दूरी 15 मिनट में तय की गई. ब्रेन डेड मरीज़ की किडनी पहुंचा कर दूसरे मरीज़ की जान बचाई गई.

बंसल अस्पताल (शाहपुरा) से न्यू चिरायु अस्पताल (बैरागढ़) तक भोपाल की यातायात पुलिस ने ग्रीन कोरिडोर बनाया गया. इस कॉरिडोर की दूरी 23 किलोमीटर है. कॉरिडोर शाम 4:20 से 4:35 बजे के दौरान बनाया गया, जब ट्रैफिक काफी बिजी रहता है.

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4 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद हालत नहीं सुधरी

बता दें कि सीहोर पुलिस में तैनात सूबेदार बृजमोहन की मां को 25 जनवरी को ब्रेन हेमरेज हुआ था. इसके बाद से वह भोपाल के बंसल अस्पताल में भर्ती थीं. लगातार 4 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद परिवार की सहमति से उनके अंगदान का फैसला किया गया.

70 साल के मरीज़ में किडनी ट्रांसप्लांट की
शांति देवी का लिवर, किडनी, आंखें बंसल हॉस्पिटल में दान की गईं, जबकि 1 किडनी चिरायु अस्पताल भेजी गई. बंसल अस्पताल से चिरायु अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. चिरायु अस्पताल में भर्ती 70 साल के मरीज़ में किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया गया. 

इतने पुलिसकर्मी व्यवस्था में लगे 

इस व्यवस्था में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात भोपाल के साथ 1 सहायक पुलिस आयुक्त, 2 निरीक्षक, 2 सूबेदार, 9 उपनिरीक्षक, 8 सहायक उपनिरीक्षक, 54 आरक्षक/प्रधान आरक्षक और 7 STS मोबाइल लगाए गए. 

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