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मध्य प्रदेश: सरकारी दुकानों से लोगों को बांटा गया जानवरों के खाने लायक चावल

इस आशय का पत्र भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक प्रभाग ने लिखा है. मंत्रालय के खाद्य और जन वितरण विभाग के स्टोरेज एंड रिसर्च डिवीजन ने मध्य प्रदेश सरकार को ये पत्र भेजा है.

सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो- पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो- पीटीआई)
हेमेंद्र शर्मा
  • भोपाल,
  • 02 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST
  • केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय का मध्य प्रदेश सरकार को पत्र
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली से बांटा चावल इंसानों के लिए अनफिट
  • आदिवासी बहुल बालाघाट और मंडला जिलों में बांटा चावल

क्या पशुओं और इंसानों के खाने के लिए एक तरह का खाद्यान्न फिट हो सकता है? लगता है मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ऐसा ही समझती है. कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में घोड़ों और मवेशियों के खाने लायक चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए लोगों में बांटा गया. ऐसा बालाघाट और मंडला जिलों में किया गया.  

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इस आशय का पत्र भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक प्रभाग ने लिखा है. मंत्रालय के खाद्य और जन वितरण विभाग के स्टोरेज एंड रिसर्च डिवीजन ने मध्य प्रदेश सरकार को ये पत्र भेजा है. पत्र 21 अगस्त को भेजा गया. इसकी प्रति आजतक/इंडिया टुडे के पास मौजूद है. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 30 जुलाई और 2 अगस्त, 2020 के बीच बालाघाट और मंडला जिलो में चार गोदामों और एक फेयर प्राइस शॉप से चावल के 32 नमूने लिए. इनकी जांच NABL से मान्यता प्राप्त सेंट्रल ग्रेन्स एनालिसिस लैबोरेट्री में हुई.

ये लैब भारत के साथ-साथ सार्क (दक्षिण एशियाई सहयोग क्षेत्र) के अन्य देशों के लिए भी रेफरल लैब है. मध्य प्रदेश के दो आदिवासी जिलों से लिए गए चावल के नमूनों की जांच से सामने आया कि ये इंसानों के खाने के लिए सही नहीं हैं और 1-a  कैटेगरी में आते हैं यानी ये अनाज सिर्फ मवेशियों के खाने के लिए ही फिट है.

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पत्र

केंद्र की ओर से मध्य प्रदेश सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है 'मंत्रालय की ओर से जारी सर्वत्र मानकों के मुताबिक 32 लिए गए नमूनों के विश्लेषण से पता चलता है कि न ये सिर्फ अस्वीकृति सीमा से बाहर, बल्कि FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के पीएफए मानकों के मुताबिक भी नहीं थे. ये अनाज इंसानों के खाने के लिए सही नहीं है, यह फीड 1 की श्रेणी में आते हैं जो कि बकरी, घोड़े और भेड़ जैसे पशुधन के लिए ही उपयुक्त है.'

पत्र की जानकारी से इनकार

मध्य प्रदेश सरकार ने हालांकि केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से लिखे गए ऐसे किसी भी पत्र की जानकारी होने से इनकार किया है. मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाहु लाल साहू ने कहा 'मुझे इस तरह के किसी भी पत्र की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर कोई ऐसा है तो हम गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे.'

वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी को सिर्फ प्रचार में ही दिलचस्पी है. कांग्रेस ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.  

 

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