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एमपीः धार में पुलिस पर गैंगरेप का आरोप, दिल्ली में भटक रहीं पीड़िताएं

होलीबेड़ा गांव की रहने वाली हल्की (बदला हुआ नाम) ने बताया, 'जिस वक्त पुलिसकर्मी गांव में आए, मेरा बच्चा मेरी गोद में था. उन्होंने बच्चे को फेंक दिया और एक पुलिसकर्मी मुझे पीटने लगा. इसके बाद मेरे साथ दुष्कर्म हुआ.'

धार जिले की आदिवासी महिलाओं ने लगाया पुलिस पर बलात्कार का आरोप धार जिले की आदिवासी महिलाओं ने लगाया पुलिस पर बलात्कार का आरोप
मौसमी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 5:31 PM IST

25 जनवरी को बाकी देश गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियां कर रहा था. लेकिन धार के आदिवासी इलाके के 2 गांवों की महिलाएं जिंदगी के सबसे स्याह लम्हे से गुजर रही थीं.

25 जनवरी की वो खौफनाक शाम..
इस जिले के होलीबेड़ा और भूतिया गांव की महिलाओं ने पुलिसवालों के खिलाफ बलात्कार और दुष्कर्म का आरोप लगाया है. महिलाओं के मुताबिक 25 जनवरी की शाम को करीब छह बजे पुलिसकर्मी कुछ अपराधियों को खोजते हुए गांव में घुसे. गांव में कदम रखते ही खाकी वर्दी वालों ने हवाई फायर किये. इससे गांव के पुरुष डरकर भाग खड़े हुए. इसके बाद पुलिसवालों का गुस्सा भोलीभाली महिलाओं पर उतरा.

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होलीबेड़ा गांव की रहने वाली हल्की (बदला हुआ नाम) ने बताया, 'जिस वक्त पुलिसकर्मी गांव में आए, मेरा बच्चा मेरी गोद में था. उन्होंने बच्चे को फेंक दिया और एक पुलिसकर्मी मुझे पीटने लगा. इसके बाद मेरे साथ दुष्कर्म हुआ.'

जब रक्षक बन गए भक्षक..
ये महिला शायद ही कभी उस खौफनाक शाम को भूल सके. लेकिन ये जुल्म झेलने वाली उसके गांव की तीन और महिलाएं भी थीं. इनमें गांव के सरपंच की पत्नी हरिया (बदला हुआ नाम) भी शामिल है. हरिया के मुताबिक 'जब सरपंच जी भाग गए तो पुलिसवाले लूटपाट पर उतर आए. वो हमारी चांदी और सबकुछ लेकर चले गए. हमने रहम की भीख मांगी तो उन्होंने हमारी इज्जत लूट ली.'

किससे करें फरियाद..
पीड़ित महिलाओं की मानें तो जुल्म का सिलसिला यहीं नहीं थमा. घटना के बाद भी उन्हें कई बार बेइज्जत किया गया. ना तो पुलिस और ना ही अस्पताल प्रशासन ने उनकी मदद में कोई दिलचस्पी दिखाई. आरोपियों का नाम बताने के बावजूद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की.

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कांग्रेस दिलाएगी इंसाफ?
अब ये महिलाएं इंसाफ की आस में धार से दिल्ली आई हैं. यहां कांग्रेस ने इन्हें इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया है. पार्टी मामले को राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में लेकर जाएगी. कांग्रेस ने वायदा किया है कि जरुरत पड़ने पर मसले को संसद में भी उठाया जाएगा.

कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने कहा, 'ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद को मामा कहने वाले मध्य प्रदेश के सीएम कंस की भूमिका निभा रहे हैं. इन महिलाओं की कहीं सुनवाई नहीं हुई. राज्य सरकार आंख मूंदे बैठी है. ये लोग राज्य के गृहमंत्री के पास गए लेकिन किसी ने इनकी फरियाद नहीं सुनी.'

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