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1 साल के बेटे का गला घोंटने का आरोप, बॉम्बे हाई कोर्ट से मां को मिली जमानत

अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है. जस्टिस पितले ने टिप्पणी की कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर मुकदमे की कार्यवाही के बिना अनिश्चित काल तक कारावास को उचित नहीं ठहराया जा सकता.

बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो) बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
विद्या
  • मुंबई,
  • 26 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST

अपने ही 14 महीने के बच्चे की हत्या के आरोप में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद एक महिला को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है. जस्टिस मनीष पितले की बेंच ने 14 दिसंबर को आदेश सुनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में रेखांकित किया.

आरोपी ममता यादव को ठाणे के नारपोली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में 1 फरवरी, 2019 को गिरफ्तार किया गया था. मामला उसके पति ने दर्ज कराया था. उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 34 के साथ धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्यों को गायब करना) के तहत आरोप लगाए गए थे. 

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14 महीने के बच्चे का गला घोंटने का आरोप

आरोप है कि ममता का अफेयर चल रहा था और इसलिए उसने अपने 14 महीने के बच्चे का गला घोंट दिया. प्रॉसिक्यूशन ने दावा किया है कि ममता ने न केवल अपने बच्चे का गला घोंटा, बल्कि उसके शव को दफनाकर ठिकाने लगाने का भी प्रयास किया.

इस मामले में तीन आरोपी शामिल हैं, जिनमें से एक किशोर था जिसने बच्चे के शव को दफनाने में मदद की थी. एक अन्य आरोपी राकेश पटेल, जो ममता यादव का प्रेमी था, को लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे में कोई ठोस प्रगति न होने के कारण 19 सितंबर, 2022 को जमानत दे दी गई थी.

प्रॉसिक्यूशन का कहना है कि ममता और उसका प्रेमी बच्चे से छुटकारा पाना चाहते थे इसलिए उसने बच्चे का गला घोंट दिया. उन्होंने कथित तौर पर भिवंडी के मनकोली में एक इंडस्ट्रियल एरिया में शव को दफनाने में आरोपी किशोर की मदद ली थी.

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क्या है पूरा मामला?

प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि ममता यादव ने मार्च 2016 में वीरेंद्र कुमार (28) से शादी की थी और दंपति का एक बेटा था. तीनों भिवंडी के दापोड़ा गांव में रहते थे. वीरेंद्र एक गोदाम में काम करता था. ममता यादव पर आरोप है कि उसका उसके पड़ोस में रहने वाले राकेश पटेल के साथ अफेयर था. नवंबर में वह उसके साथ उत्तर प्रदेश के एक गांव में भाग गई थी. वे भिवंडी लौटे और ममता राकेश और उसके 1 साल के बेटे आर्यन के साथ रहनी लगी.

कुछ दिनों बाद वीरेंद्र ने जब बच्चे को ममता के साथ नहीं देखा तो उसे शक हुआ. उसने उससे पूछताछ की लेकिन जब ममता ने गोलमोल जवाब दिए तो शक और पुख्ता हो गया. फिर वीरेंद्र ने मामला दर्ज कराया. बाद में बच्चे का शव मौके से बरामद गया.

हिरासत में बिताए छह साल

अधिवक्ता अमित इचाम और चैतन्य पुरनकर ने तर्क दिया कि मुकदमे में कोई ठोस प्रगति न होने के बावजूद ममता पहले ही छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुकी है. उन्होंने कहा कि जनवरी 2019 में आरोप तय होने के बावजूद, आज तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है. प्रॉसिक्यूशन 36 गवाहों से पूछताछ करने की योजना बना रहा है. यह प्रक्रिया निकट भविष्य में समाप्त होने की संभावना नहीं है.

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'सिर्फ आरोपों की गंभीरता के आधार पर जेल उचित नहीं'

हालांकि, प्रॉसिक्यूशन ने अपराध की गंभीरता और इसके पीछे के कथित मकसद पर जोर देते हुए जमानत का विरोध किया. जस्टिस पितले ने कहा कि बिना मुकदमे के लंबे समय तक जेल में रहना आरोपी के त्वरित मुकदमे के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. 

अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है. जस्टिस पितले ने टिप्पणी की कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर मुकदमे की कार्यवाही के बिना अनिश्चित काल तक कारावास को उचित नहीं ठहराया जा सकता.

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