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मुंबई टेरर अटैक से बरी शख्स पहुंचा कोर्ट, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट न मिलने पर लगाई अर्जी

याचिकाकर्ता फहीम अरशद मोहम्मद यूसुफ अंसारी पर मुंबई टेरर अटैक को लेकरर आरोप लगे थे. वह, अजमल कसाब सहित 3 आरोपियों में शामिल था. 2008 में उसके खिलाफ भी मुकदमा चलाया गया था. हालांकि, बाद में उसे आतंकवाद से जुड़े मामलों में बरी कर दिया गया.

प्रतिकात्मक तस्वीर (Image - India Today) प्रतिकात्मक तस्वीर (Image - India Today)
विद्या
  • मुंबई,
  • 27 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

मुंबई अटैक (26/11) से बरी एक शख्स ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. शख्स ने मांग की है कि ठाणे पुलिस उसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) प्रदान करे. इस याचिका पर 18 मार्च को सुनवाई होगी.

बता दें कि याचिकाकर्ता फहीम अरशद मोहम्मद यूसुफ अंसारी पर मुंबई टेरर अटैक को लेकरर आरोप लगे थे. वह, अजमल कसाब सहित 3 आरोपियों में शामिल था. 2008 में उसके खिलाफ भी मुकदमा चलाया गया था.

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अंसारी के खिलाफ लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का सदस्य होने और समुद्री मार्ग से पाकिस्तान से मुंबई पहुंचे 10 फिदायीनों को नक्शा मुहैया कराने का आरोप था. आरोप में यह भी कहा गया था कि उसने कथित तौर पर आतंकियों को शहर में प्रमुख स्थानों का पता लगाने में मदद की.

अंसारी और एक अन्य आरोपी उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल में थे, जहां उन्हें एक मामले में दोषी ठहराया गया था. लेकिन आतंकवाद के सभी मामलों से बरी कर दिया गया था.

2019 में जेल से रिहा होने के बाद ठाणे में रहने वाले अंसारी ने एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करना शुरू किया, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान वह बंद हो गई. डिलीवरी बॉय के तौर पर कुछ काम करने के बाद उसने फिर से मुंब्रा में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करना शुरू कर दिया. हालांकि, पैसे बहुत कम थे.

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गुजारा चलाने के लिए अंसारी ने तिपहिया ऑटो-रिक्शा लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जो उसे 1 जनवरी, 2024 को मिला. इसके बाद, उसने अनिवार्य पीसीसी के लिए आवेदन किया जो पुलिस सेवा वाहन (PSV) बैज प्राप्त करने के लिए जरूरी है. व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने के लिए यह बैज अनिवार्य है. 13 अगस्त 2024 को जवाब मिला, जिसमें अधिकारियों ने अंसारी बताया कि वह प्रतिबंधित संगठन का सदस्य है, इसलिए उसे पीसीसी प्रदान नहीं किया जा सकती. इसलिए अब वह अदालत के पास पहुंचा है.

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