
महाराष्ट्र के बदलापुर में दो नाबालिग लड़कियों से यौन उत्पीड़न के मामले में दो सदस्यों वाली समिति ने राज्य सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है. सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दोनों नाबालिग लड़कियों के प्राइवेट पार्ट का हाइमन (hymen) करीब एक इंच तक फटा हुआ है.
बता दें कि आरोपी अक्षय शिंदे ने 1 अगस्त को एक संविदा कर्मचारी के रूप में स्कूल जॉइन किया था, उसे बैकग्राउंड की जांच के बिना ही रख लिया गया था. उसे बिना किसी पहचान पत्र के स्कूल परिसर में महिला शौचालयों सहित दूसरे स्थानों पर जाने की भी अनुमति थी. शुरुआती जांच में ऐसा लग रहा है कि वह आदतन अपराधी था.
किसने की आरोपी की नियुक्ति?
आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी की नियुक्ति किसी आउटसोर्स एजेंसी ने की है या किसी सिफारिश के आधार पर हुई है. स्कूल प्रशासन के स्तर पर बड़ी चूक पाई गई है. बाल अधिकार आयोग स्कूल प्रशासन को इस मामले को संभालने में विफल होने के बारे में प्रश्नों का एक सेट भेजेगा. अगले 7 दिनों में जवाब मांगे जाएंगे.
स्कूल ने 48 घंटे तक दबाया केस
समिति ने सवाल उठाया है कि इस मामले में स्कूल प्रशासन पर POCSO एक्ट क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए? यह देखा गया है कि स्कूल प्रशासन ने शिकायत को 48 घंटे तक दबाए रखा. स्कूल प्रिंसिपल ने 14 अगस्त को ट्रस्टी को घटना की सूचना दी.
नाबालिगों के इलाज में लगा दिए 12 घंटे
शिकायत के बाद स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों से मुलाकात तक नहीं की. अस्पताल ने नाबालिगों के इलाज में 12 घंटे लगा दिए. बताया जा रहा है कि स्कूल में शौचालय एक अलग जगह पर है, जो स्टाफ रूम से बहुत दूर है. सुरक्षा के लिए कोई उचित CCTV नहीं लगाया गया है. बदलापुर में नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले के IO ने अभिभावकों से पूछा है कि क्या लड़कियां दो घंटे तक साइकिल चला रही थीं. इस सवाल से पता चलता है कि ऐसे संवेदनशील मामलों से निपटने में कोई संवेदनशीलता नहीं बरती गई.