
भाजपा नेता सुजय विखे पाटिल ने लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम मशीन के माइक्रोकंट्रोलर के सत्यापन की मांग की है. सुजय विखे को अहमदनगर लोकसभा सीट से शरद पवार की पार्टी एनसीपी के उम्मीदवार नीलेश लंके ने हराया था. हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद विखे ने ईवीएम में लगी चिप को लेकर संदेह के चलते चुनाव अधिकारी को आवेदन दिया है. 2019 में सांसद बनने के बाद इस बार सुजय विखे को लोकसभा चुनाव में 28,929 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवार को ईवीएम की बर्न मेमोरी की जांच और सत्यापन के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं के हिसाब से आधिकारिक आवेदन करने की अनुमति है. इसके लिए चुनाव परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होता है.
इसके अनुसार, परिणाम घोषित होने के बाद, बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट के माइक्रोकंट्रोलर की जांच इन मशीनों को बनाने वाले इंजीनियरों द्वारा की जा सकेगी. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिन उम्मीदवारों ने आवेदन किया है, उन्हें मतदान केंद्र या सीरियल नंबर से ईवीएम की पहचान करनी चाहिए और सभी उम्मीदवारों के पास सत्यापन के समय मौजूद रहने का विकल्प रहता है.
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ईवीएम के माइक्रोकंट्रोलर की जांच की प्रक्रिया
- मतदान से 15 दिन पहले सभी उम्मीदवारों के नाम और उनके चुनाव चिन्ह सिंबल लोडिंग यूनिट के माध्यम से अपलोड कर दिए जाते हैं.
- इसके बाद, ईवीएम मशीनों को सील करके पास के स्टोर रूम में रख दिया जाता है.
- माइक्रोकंट्रोलर एक वन टाइम प्रोग्राम्ड चिप है जिसे ईवीएम, बैलेट कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट मशीन में निर्माण के समय लगाया जाता है.
- चुनाव में दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार माइक्रोकंट्रोलर जांच के लिए आवेदन करने के लिए पात्र है.
- उम्मीदवार की मांग के अनुसार परिणाम के बाद माइक्रोकंट्रोलर की बर्न मेमोरी की जांच की जा सकती है.
- इसके लिए ईवीएम मशीन बनाने वाले इंजीनियरों को सूचित करना होगा.
- पूरी प्रक्रिया की लागत और 18% जीएसटी आवेदन करने वाले उम्मीदवार को देना होगा.
- यदि ईवीएम मशीन के साथ कोई छेड़छाड़ पाई जाती है, तो संबंधित खर्च वापस कर दिया जाएगा.
डिप्टी कलेक्टर रैंक का अधिकारी होता है निरीक्षक
निर्वाचन आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश पहले से जारी हो चुके हैं. इसके अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है. माइक्रोकंट्रोलर के सत्यापन और निरीक्षण के लिए डिप्टी कलेक्टर रैंक का अधिकारी निरीक्षक के रूप में कार्य करता है. इन मशीनों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जिला निर्वाचन अधिकारी, प्रभारी इंजीनियर के परामर्श से इकाइयों की बर्न मेमोरी के बारे में प्रमाण पत्र जारी करता है.