
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MH CET) को एक निर्देश दिया है. कोर्ट ने मेडिकल उम्मीदवार प्रदीप जयभवे (18) और योगिनी पाटिल (19) की याचिका पर 'विचार करने में अदालत की ओर से परेशानी' के कारण सीईटी को उनके उम्मीदवारी वाले फॉर्म को स्वीकार करने का निर्देश दिया है. दरअसल, दोनों उम्मीदवारों ने गलती से बेहतर विकल्प वाले मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने की चाह में केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया (CAP) वाले राउंड में गलती से डेंटल कॉलेज का चयन किया था.
जज संदीप मारने और मंजुशा देशपांडे ने दोनों उम्मीदवारों के केस को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि दोनों मेडिकल एस्पिरेंट्स ने सीएपी के पहले राउंड्स में एमबीबीएस कोर्स के लिए कॉलेजों में प्रवेश पा लिया था, लेकिन अब उन्हें बाद के ऑनलाइन सीएपी स्ट्रे वैकेंसी राउंड में भाग लेने से मना कर दिया गया है.
एक जैसे नामों के कारण हुई गलती
सीईटी सेल की तरफ से उनकी वकील ध्रुति कपाड़िया ने कोर्ट के सामने ये बात रखी कि सीईटी ने 27 अक्टूबर 2024 को एक नोटिस जारी किया था जिसमें उन्होंने ऑनलाइन सीएपी स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बारे में जानकारी दी थी. नोटिस में उन्होंने राउंड के लिए आखिरी तारीख की घोषणा की थी जिसमें उम्मीदवारों को अपने कॉलेज के लिए प्रेफ्रेंस ऑनलाइन के माध्यम से 27 अक्टूबर 2024 की रात 11:59 तक बतानी थी. उन्होंने यह भी बताया कि सीईटी सेल सोमवार को ऑनलाइन सीएपी स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए चुने जाने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने वाली थी, लेकिन अब उनके लिए इस राउंड के उम्मीदवारों के विकल्प पर विचार करना असंभव हो गया है.
हालांकि दोनों जजों ने इस मामले में एक सामान्य चीज गौर की जिसमें दोनों मेडिकल उम्मीदवार प्रदीप और योगिनी एक ही गलती का शिकार हुए थे. प्रदीप को जहां 'गवरमेंट ऑफ मेडिकल कॉलेज' चाहिए था, वो उसने गलती से 'गवरमेंट ऑफ डेंटल कॉलेज' भर दिया और वहीं योगिनी को 'टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और नायर हॉस्पिटल मेडिकल कॉलेज, मुंबई' में दाखिला चाहिए था लेकिन उसने गलती से 'नायर हॉस्पिटल डेंटल कॉलेज, मुंबई' भर दिया था. कोर्ट का कहना है कि ये गलती दोनों कॉलेजों के एक जैसे नामों के कारण हुई है.
कोर्ट ने दिया इस मामले में अपना बयान
जज ने कहा, 'इस बात में बिलकुल सच्चाई है कि दोनों याचिका कर्ताओं ने मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिए प्रवेश सुरक्षित कर लिया और उन्होंने बाकी कॉलेजों में अपनी पसंद को बेहतर बनाने के लिए आगे सीएपी राउंड में भागीदारी जारी रखी. इसलिए यह समझ पाना मुश्किल है कि वो बाद में क्यों अपनी मर्जी से डेंटल कोर्स में एडमिशन लेंगे.'
जज ने देखा कि याचिकाओं का जिक्र 25 अक्टूबर 2024 को कोर्ट के सामने 26 अक्टूबर 2024 को करने की अपील के साथ किया गया था. हालाँकि, 26 अक्टूबर 2024 को याचिकाओं पर सुनवाई करने में जजों की ओर से परेशानी के कारण, सर्कुलेशन सोमवार के लिए दिया गया था. जज ने कहा, "हम नहीं चाहते कि 26 अक्टूबर 2024 को याचिकाओं पर सुनवाई करने में कोर्ट की ओर से परेशानियों के कारण याचिका कर्ताओं को तकलीफ हो.'
कोर्ट का सीईटी सेल को निर्देश
कोर्ट का बयान सुनने के बाद वकील ध्रुति कपाड़िया ने कोर्ट से कहा कि अगर कोर्ट ये आदेश जारी करता है कि फिजिकल फॉर्म माने जा सकते हैं तो सीईटी सेल याचिका कर्ताओं द्वारा चुने गए विकल्प को अपने पास अपडेट करेगा, इसके बावजूद कि विकल्प चुनने की आखिरी तारीख निकल चुकी है. जज ने इसके बाद सीईटी सेल को ये निर्देश दिया कि वो तत्काल अपनी वेबसाइट को खोल कर याचिका कर्ताओं के विकल्प को अपडेट कर दें और फिर अपनी ऑनलाइन सीएपी स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए चुने जाने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट सोमवार रात तक घोषित करने के लिए आगे बढ़ें.
जज ने अंत में स्पष्ट किया कि आज के समय में इन मामलों में कार्रवाई का यह असामान्य तरीका केवल कोर्ट की ओर से पहले याचिकाओं पर विचार करने में परेशानी के कारण अपनाया गया है और इसलिए इन आदेशों को किसी अन्य मामले में मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम निर्देश देने के बाद याचिका कर्ताओं की आगे की सुनवाई को 14 नवंबर, 2024 तक के लिए स्थगित कर दिया है.