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अबू सलेम की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का 'आखिरी मौका'

अबू सलेम वर्तमान में नासिक सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है, उसने फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. उसने जेल प्रशासन को यह निर्देश देने की मांग की थी कि उसकी पूरी जेल में बिताई गई अवधि-24 साल, 9 महीने और 16 दिन (31 दिसंबर 2024 तक) को ध्यान में रखते हुए उसे रिहाई की तारीख बताई जाए.

अबू सलेम (फाइल फोटो) अबू सलेम (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • मुंबई,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई, क्योंकि उन्होंने 21 दिन बीत जाने के बाद भी गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका पर जवाब दाखिल नहीं किया है. जस्टिस सारंग कोतवाल और एसएम मोडक की बेंच ने दोनों सरकारों को 'अंतिम मौका' देते हुए निर्देश दिया कि वे 16 अप्रैल से पहले अपना जवाब दाखिल करें.

अबू सलेम वर्तमान में नासिक सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है, उसने फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. उसने जेल प्रशासन को यह निर्देश देने की मांग की थी कि उसकी पूरी जेल में बिताई गई अवधि-24 साल, 9 महीने और 16 दिन (31 दिसंबर 2024 तक) को ध्यान में रखते हुए उसे रिहाई की तारीख बताई जाए.

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बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है. केंद्र सरकार को अदालत के 10 मार्च के आदेश के बाद याचिका में पक्षकार बनाया गया था, केंद्र ने भी अब तक जवाब नहीं दिया. इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि याचिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है, लेकिन आप इसमें कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं. हमने 21 दिन का समय दिया था, फिर भी जवाब दाखिल नहीं हुआ. अदालत ने ये भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी.

25 साल की सजा पूरी होने का दावा

अबू सलेम की वकील फरहाना शाह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उसे 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था. इसके बाद 2015 और 2017 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसमें 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़ा मामला भी शामिल है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में भारत सरकार द्वारा पुर्तगाल को दी गई संप्रभु गारंटी को ध्यान में रखते हुए उसकी उम्रकैद को 25 वर्षों तक सीमित कर दिया. सलेम ने पहले सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी.

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याचिका में क्या तर्क दिया गया?

याचिका में तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 25 साल की सजा की अवधि अब पूरी हो चुकी है, जिसमें उसका अंडरट्रायल (2005-2017) और दोषसिद्धि के बाद की अवधि (2015-2024) शामिल है. इसके अलावा, उसने अपने अच्छे आचरण के चलते 3 साल और 16 दिन की छूट भी अर्जित की है.

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