
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे निवासी को मिली आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर जमानत दे दी. उसे वर्ष 2018 में अपनी प्रेमिका के चचेरे भाई की हत्या करने और लाश का सिर काटने के लिए दोषी ठहराया गया था. 19 जून, 2018 को पुणे के कोंढवा बुद्रुक इलाके में पुण्यधाम आश्रम के पास कुछ मजदूरों को एक आदमी का सिर कटा और अर्धनग्न शव मिला था. घटना के 50 फुट के दायरे से खून से सनी एक टी-शर्ट और एक चप्पल भी बरामद की गई थी.
आरोप है कि हमलावर ने पीड़ित पर धारदार हथियार से हमला किया, जिससे उसके पेट और हाथ पर चोटें आईं. फिर उसने सबूत मिटाने की कोशिश में अपने कपड़े उतार दिए. जांच के दौरान कथित तौर पर हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया चाकू एक नहर में मिला. उस समय 19 वर्षीय निज़ाम हाशमी को पुलिस ने इस आरोप में गिरफ्तार किया था कि उसने 20 वर्षीय उमेश इंगले की केवल इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उसे अपनी चचेरी बहन की हाशमी से नजदीकी पसंद नहीं थी.
अभियोजन पक्ष के अनुसार हाशमी ने इंगले से छुटकारा पाने की योजना बनाई और उसे ईद के मौके पर अपने साथ 'शीर खुर्मा' खाने के लिए आमंत्रित किया. जब इंगले 'शीर खुर्मा' खा रहा था उसी दौरान हाशमी ने उस पर बेरहमी से हमला किया. पहचान छुपाने की कोशिश में हाशमी ने इंगले के शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया.
इस केस में कुल 24 गवाहों ने अपने बयान दर्ज किए और पुणे सत्र अदालत ने हाशमी को दोषी पाया और 30 सितंबर, 2023 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके बाद हाशमी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की और अंतरिम उपाय के तौर पर जमानत मांगी.
अभियोजन पक्ष के अनुसार हाशमी और इंगले को सीसीटीवी फुटेज में 19 जून, 2018 को शाम लगभग 7.50 बजे कथित तौर पर उस स्थान के पास देखा गया था, जहां क्षत-विक्षत शव देखा गया था. जस्टिस अजय गडकरी और श्याम चांडक की बेंच ने कहा कि हाशमी को इंगले के साथ आखिरी बार देखे जाने और उसके बाद मृतक का शव मिलने के बीच काफी अंतर है.
इसके अलावा पीठ हाशमी की ओर से पेश वकील सना रईस खान से सहमत हुई. वकील ने यह तर्क दिया कि अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार एक खाई/तालाब से, घुटने के स्तर तक पानी से भरे स्थान से बरामद किया गया था. रिपोर्ट में बताया गया कि इंसान का खून हथियार पर लगा मिला. पीठ ने कहा, 'प्रथम दृष्टया हम अभियोजन के मामले को उस हद तक स्वीकार करने में असमर्थ हैं.'
पीठ ने यह भी कहा कि हाशमी 5 साल से अधिक समय तक सलाखों के पीछे रहा. इसलिए अपील लंबित रहने के दौरान, पीठ ने उसकी सजा निलंबित कर दी और जमानत दे दी.