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'छत्रपति शिवाजी महाराज ने आक्रमणों के चक्र को तोड़ा', पुस्तक विमोचन समारोह में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले शिवाजी महाराज पहले योद्धा थे जिन्होंने इन आक्रमणों का सशक्त जवाब दिया. उन्होंने कहा, "शिवाजी महाराज पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने विदेशी आक्रमणों के खिलाफ एक मजबूत समाधान दिया."

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (File Photo) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (File Photo)
योगेश पांडे
  • नागपुर,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 9:21 AM IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज भारत में सदियों से चल रही विदेशी आक्रमणों की पराजय की परंपरा का समाधान बनकर उभरे. नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए भागवत ने बताया कि सिकंदर महान के समय से लेकर इस्लाम के प्रसार के नाम पर हुए बड़े आक्रमणों तक, भारत लगातार युद्ध हारता रहा और इसकी व्यवस्थाओं को नष्ट किया जाता रहा.

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उन्होंने कहा, "यह परंपरा सदियों तक चलती रही, जिसमें कोई समाधान नहीं निकला, न ही विजयनगर साम्राज्य और न ही राजस्थान के शासकों ने इसका हल खोजा."

आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले शिवाजी महाराज पहले योद्धा थे जिन्होंने इन आक्रमणों का सशक्त जवाब दिया. उन्होंने कहा, "शिवाजी महाराज पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने विदेशी आक्रमणों के खिलाफ एक मजबूत समाधान दिया." 

उन्होंने उल्लेख किया कि भारत में लगातार युद्धों में हारने का दौर शिवाजी महाराज के उदय के साथ समाप्त हुआ. उन्होंने कहा, "शिवाजी महाराज ने इस चक्र को तोड़ा और अपनी रणनीति से भारत को आत्मरक्षा की नई दिशा दी." 

भागवत ने शिवाजी महाराज को 'युगपुरुष' बताते हुए कहा कि उन्होंने मुगल आक्रमण सहित देश में हो रहे निरंतर हमलों को रोकने का काम किया. उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा आगरा में कैद किए जाने के बावजूद, शिवाजी महाराज वहां से भागकर फिर से अपने क्षेत्रों पर अधिकार जमाने में सफल हुए.

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उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के बाद विदेशी आक्रमणकारियों के युग का अंत होने लगा. भागवत ने शिवाजी महाराज से प्रेरित होकर अन्य क्षेत्रों में उठे स्वतंत्रता संग्रामों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "महाराज ने दक्षिण भारत को जीत लिया, और उनके संघर्ष से प्रेरित होकर बुंदेलखंड में छत्रसाल, राजस्थान में दुर्गादास राठौड़ के नेतृत्व में राजपूत शासक, और कूच बिहार में चक्रध्वज सिंह ने मुगलों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया." 

भागवत ने बताया कि चक्रध्वज सिंह ने एक अन्य राजा को पत्र लिखकर शिवाजी महाराज को आदर्श मानने और उनकी रणनीतियों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया था. आरएसएस प्रमुख ने शिवाजी महाराज की विरासत की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे आज भी प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं और उनके कार्य व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय हैं.

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