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'BJP के सहयोग से राज्यों में करें शिवसेना का विस्तार', पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में बोले शिंदे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने श्रीनगर में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की. यूपी और बिहार के साथ ही मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से पहुंचे पदाधिकारियों से शिंदे ने साफ कहा कि वे अपने-अपने राज्य में शिवसेना के विस्तार पर काम करें. इसमें बीजेपी की भी मदद ली जाए.

एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो) एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2023,
  • अपडेटेड 8:52 AM IST

एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ सरकार बना ली थी. एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच शिवसेना पर कब्जे की जंग छिड़ गई. शिवसेना पर कब्जे की जंग चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंची और फैसला एकनाथ शिंदे के पक्ष में आया. हालांकि, शिवसेना की संपत्तियों पर कब्जे की जंग शिंदे हार गए थे. शिवसेना पर कब्जे के बाद शिंदे का ध्यान अब पार्टी के विस्तार पर है.

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एकनाथ शिंदे ने यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बैठक की. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी राज्यों के पार्टी पदाधिकारियों को संगठन के विस्तार के निर्देश दिए और ये भी कहा कि इसमें हमारी गठबंधन सहयोगी बीजेपी का भी सहयोग लिया जाए.

एकनाथ शिंदे के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस बैठक में यूपी और बिहार के साथ ही मध्य प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों के पदाधिकारी भी शामिल हुए. इस बैठक में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने पार्टी पदाधिकारियों को दूसरे राज्यों में शिवसेना के विस्तार के लिए काम करने के निर्देश दिए.

गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के एक साल पूरे होने वाले हैं. पिछले साल जून महीने में ही एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ 39 विधायकों को लेकर बगावत कर दी थी. शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई थी.

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उद्धव सरकार की विदाई के बाद एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी. एकनाथ शिंदे सीएम बने तो वहीं देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम. सरकार गठन के बाद शिवसेना पर कब्जे की जंग चुनाव आयोग के दर पर पहुंची. चुनाव आयोग का फैसला एकनाथ शिंदे के पक्ष में आया था. चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और निशान शिंदे गुट को सौंप दिया था.

 

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