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महाराष्ट्र में डिजिटल विज्ञापनों पर घमासान, जानिए राजनीतिक पार्टियां कितना खर्च कर रही हैं

महाराष्ट्र सरकार के डिजिटल विज्ञापनों पर 90 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना पर विवाद के बीच, पिछले 30 दिनों में राजनीतिक दलों और सरकारी एजेंसियों ने 8.5 करोड़ रुपये से अधिक ऑनलाइन विज्ञापन पर खर्च किए हैं. इसमें सबसे ज्यादा खर्च महायुति गठबंधन ने किया, जबकि महाविकास अघाड़ी का खर्च काफी कम रहा.

महाराष्ट्र में  पिछले 30 दिनों में राजनीतिक दलों और सरकारी एजेंसियों ने 8.5 करोड़ रुपये से अधिक ऑनलाइन विज्ञापन पर खर्च किए हैं. महाराष्ट्र में पिछले 30 दिनों में राजनीतिक दलों और सरकारी एजेंसियों ने 8.5 करोड़ रुपये से अधिक ऑनलाइन विज्ञापन पर खर्च किए हैं.
शुभम तिवारी/आकाश शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 8:46 PM IST

महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल विज्ञापन पर 90 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान विपक्षी पार्टियों की कड़ी आलोचना का शिकार हो रहा है. लेकिन सवाल यह है कि राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक पार्टियां और सरकारी एजेंसियां ऑनलाइन विज्ञापनों पर कितना खर्च कर रही हैं?

इसका जवाब जानने के लिए इंडिया टुडे ने पिछले 30 दिनों में गूगल और मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर राजनीतिक विज्ञापनों का डेटा एनालाइज किया. इसमें महायुति (भाजपा, शिवसेना, एनसीपी-अजित पवार गुट) और महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, एनसीपी-शरद पवार गुट, शिवसेना-UBT) जैसे राजनीतिक गठबंधनों और सरकारी विभागों द्वारा किए गए खर्च को देखा गया.

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मेटा की ऐड लाइब्रेरी रिपोर्ट और गूगल ऐड्स ट्रांसपेरेंसी सेंटर से मिले डेटा के अनुसार, 9 सितंबर से 8 अक्टूबर के बीच महाराष्ट्र में राजनीतिक विज्ञापन पर 8.5 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए. हमने इस विश्लेषण में सिर्फ उन्हीं विज्ञापनों को शामिल किया है जिनकी लागत 1 लाख रुपये से अधिक थी.

इतने समय में महायुति गठबंधन ने 2.49 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कि महाविकास अघाड़ी के खर्च (24.59 लाख रुपये) से दस गुना ज्यादा है. पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने इस दौरान डिजिटल विज्ञापनों पर कोई पैसा खर्च नहीं किया. वहीं, शरद पवार के एनसीपी गुट का खर्च भी मामूली था, जो 18 लाख रुपये तक भी नहीं पहुंचा.

महायुति के 2.49 करोड़ रुपये के खर्च में से भाजपा और उसके समर्थकों ने 2.18 करोड़ रुपये – यानी 87% से अधिक – विभिन्न वेबसाइटों, यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सार्वजनिक आउटरीच के लिए खर्च किए.

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राजनीतिक पार्टियों में शरद पवार का एनसीपी गुट 18 लाख रुपये के साथ दूसरे नंबर पर रहा. उसके बाद शिवसेना ने 16.5 लाख रुपये खर्च किए. अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट ने 13.63 लाख रुपये खर्च किए.

डेटा के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में सिर्फ 6.5 लाख रुपये खर्च किए हैं. हालांकि, सबसे ज्यादा खर्च करने वाले सरकारी विभाग थे जिन्होंने इस अवधि में 2.74 करोड़ रुपये के ऑनलाइन विज्ञापन दिए.

प्रमुख सरकारी विज्ञापनदाताओं में महिला एवं बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र की आधिकारिक पीआर एजेंसी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, जल जीवन मिशन, महाराष्ट्र बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड और आवास विभाग शामिल थे. इसके अलावा राजनीतिक नेताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर 25 लाख रुपये के ऑनलाइन विज्ञापन दिए.

विज्ञापन खर्च पर विवाद

इस हफ्ते की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 5 दिनों के लिए 90 करोड़ रुपये के विज्ञापन अभियान का टेंडर जारी किया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया. महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के नेताओं ने इसे "लूट" कहा और तर्क दिया कि ये पैसा जनता की भलाई पर खर्च किया जा सकता था.

शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "सिर्फ डिजिटल प्रचार के लिए महाझूठी सरकार ने 5 दिन का 90 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है. यानी 18 करोड़ रुपये प्रति दिन, 75 लाख रुपये प्रति घंटा और 1.5 लाख रुपये प्रति मिनट! लूट मची है. यही वो तरीका है जिससे महाराष्ट्र के टैक्सपेयर्स का पैसा राजनीतिक लाभ के लिए पानी की तरह बहाया जा रहा है."

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