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Indian Railway: प्लेन की तर्ज पर मुंबई की ट्रेनों में लगेंगे ब्लैक बॉक्स और CCTV, बढ़ाई जाएगी सुरक्षा

Black Box Indian railway लोको पायलट के केबिन में कैमरे लगाए जाएंगे. यह सब CVVR सिस्टम में रिकॉर्ड होगा और जैसे किसी विमान दुर्घटना के समय ब्लैक बॉक्स से मदद मिलती है, उसी तरह किसी भी प्रकार की दुर्घटना या आपात स्थिति में इस सिस्टम से रेलवे को मदद मिलेगी.

aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 12 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:02 AM IST
  • ब्लैक-बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल करेगा रेलवे
  • ब्लैक-बॉक्स से आपात स्थिति में रेलवे को मिलेगी मदद

Indian Railway Black Box: मुंबई ऐसा शहर है, जहां लोग भारत के अलग-अलग कोने से अपने सपने पूरे करने के लिए लोग आते हैं. ऐसे में मुंबई में रहने वाले लोगों के किए मुंबई की लोकल ट्रेन भी अपने सपने पूरा करने का एक ज़रिया है. जहां लोकल को मुंबई की लाइफ़ लाइन माना जाता है और प्रतिदिन लाखों लोग लोकल में यात्रा करते है और अपने काम और अपने सपनों तक पहुंचने की कोशिश करते है. ऐसे में  हवाई जहाज की तर्ज पर अब रेलवे मुंबई की ट्रेनों में  'ब्लैक-बॉक्स तकनीक' का इस्तेमाल करने जा रहा है. 

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ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रेलवे यह कदम उठाने जा रहा है. प्लेन की तरह ‘ब्लैक बॉक्स’ को लंबी दूरी की ट्रेनों के इंजन में लगाया जाएगा. यह लोको पायलट के केबिन और लोकल ट्रेनों के मोटरमैन केबिन को Crew Voice & Video Recording System से लैस करने की शुरुआत की है. साथ ही बोगी के बाहर सीसीटीवी और ऑडिओ विजुअल तकनीक लगाई जाएगी. 

लोको पायलट के केबिन में कैमरे लगाए जाएंगे. जिनके जरिए  लोको पायलट और असिस्टेन्ट लोको पायलट पर नजर रखी जाएगी. यह सब  CVVR सिस्टम में रिकॉर्ड होगा और जैसे किसी विमान दुर्घटना के समय ब्लैक बॉक्स से मदद मिलती है, उसी तरह किसी भी प्रकार की दुर्घटना या आपात स्थिति में इस सिस्टम से रेलवे को मदद मिलेगी. इस तकनीक की मदद से रेल दुर्घटना होने पर असली कारण का पता लगाया जा सकता है.

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इसके अलावा सफर के दौरान पटरियों पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने और सिग्नल पर नजर रखने के लिए लोकोमोटिव के बाहर CVVRS से लैस कैमरे लगाए गए हैं. यह उपकरण ट्रेन की स्पीड को रिकॉर्ड करता है. यदि लोको पायलट ने ट्रेन को निर्धारित गति से तेज चलाया होगा अथवा सिग्नल पर स्पीड का ध्यान नहीं रखा होगा तो उसकी जानकारी रिकॉर्ड हो जाएगी. आमतौर पर स्पीड के कारण ही ट्रेन डीरेल होती है. लिहाजा स्पीड के आधार पर ड्राइवर की गलती है या नहीं? इसका पता चल जाएगा.

इस सिस्टम के लगने से यात्रियों की यात्रा और भी सुरक्षित हो सकेगी.  इस सिस्टम को लगाने के लिए बजट में 2.30 करोड़ रुपये रेलवे को दिए गए हैं. 

(रिपोर्ट- पारस डामा)

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