
लूडो एक ऐसा गेम है जो खाली वक्त में ज्यादातर लोगों ने खेला है. कोरोना काल में तो इस गेम को ऑनलाइन मोड पर कई बार खेला गया. क्या बूढ़े क्या बच्चे, सभी लूडो खेलते दिख जाते हैं. लेकिन अब इसी गेम के खिलाफ हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका के जरिए जोर देकर कहा गया है कि इस गेम के जरिए लोगों को जुए की लत लगाई जा रही है. वहीं ये भी तर्क दिया गया है कि लूडो कौशल नहीं किस्मत का खेल है.
लूडो कौशल या किस्मत का खेल?
ये याचिका महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के केशव मुले की ओर दायर की गई है. उनकी माने तो लूडो का खेल उसके पांसा गिरने के बाद उस पर आने वाले अंकों पर निर्भर करता है. इस तरह से देखा जाए तो लूडो कौशल नहीं किस्मत का खेल है. इस खेल में लोग जब कुछ दांव पर लगाते हैं तो यह जुए का रूप ले लेता है.
वहीं याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ऑनलाइन पॉपुलर हो रहे लूडो के इस गेम में लोग जमकर पैसा लगा रहे हैं. गैम्बलिंग प्रतिबंधक कानून की धारा 3, 4, और 5 के तहत आता है. ऐसे में ऐप से जुड़े प्रबंधन के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.
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बॉम्बे हाई कोर्ट सुनाएगा फैसला
वैसे याचिका में एक गेमिंग साइट का हवाला देते हुए बताया गया है किस तरह से लूडो के जरिए लोगों को जुए की लत लगाई जा रही है. दावा किया गया है कि इस गेम को चार लोग 5-5 रुपए का दांव पर लगा कर खेलते हैं. जीतने वाले को 17 रुपए मिलते हैं, जबकि ऐप चलाने वाले को 3 रुपए मिलते हैं. इसकी गेमिंग स्टाइल पर भी सवाल उठाया गया है और इसे समाज में जुए को प्रमोट करने वाला बताया जा रहा है.
अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में तो याचिका दायर की ही गई है, लेकिन इससे पहले याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में यही अपील की थी. लेकिन तब कोर्ट ने लूडो को कौशल का खेल बता दिया था और FIR दर्ज करने से भी मना कर दिया था.
उसके बाद ही बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया गया और अब किसी फैसले का इंतजार है. अभी के लिए इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिका पर 22 जून को सुनवाई होगी.
आजतक ब्यूरो