
बुनियादी सुविधाओं से अब भी देश के कुछ इलाके कैसे वंचित हैं और कैसे वहां के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, ये महाराष्ट्र के कोल्हापुर इलाके में हुई एक घटना से साफ होता है. जिले के वासनोली धनगरवाड़ा इलाके में सड़क न होने की वजह से एक गर्भवती महिला को बांस की डोली बना कर डिलिवरी के लिए ले जाया जा रहा था. रास्ते में ही महिला ने बेटी को जन्म दिया. महिला और बच्चे को किसी तरह गारगोटी ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दोनों सही सलामत हैं.
जिले की भूदरगढ़ तहसील के तहत आने वाली धनगरवाड़ा बस्ती में करीब 200 लोगों की आबादी है. धनगरवाड़ा से करीब तीन किलोमीटर चढ़ाई वाला ऐसा रास्ता है जहां पैदल ही चलकर जाना पड़ता है. इस उबड़ खाबड़ और दलदल वाले रास्ते से ही पक्की सड़क तक पहुंचा जा सकता है. करीब तीन दिन तक चलती रही मूसलाधार बारिश ने इसे और दुर्गम बना दिया.
शुक्रवार को बस्ती में रहने वाली 23 साल की संगीता फाटकरे को प्रसव पीड़ा होने पर घरवालों ने आशा सेविका और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से फोन पर संपर्क किया. राधानगरी जंगल से सटे इस रास्ते पर अकेले चलना भी जोखिम से भरा है. दोनों आशा सेविका और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तेज बारिश में इसी रास्ते से धनगरवाड़ा पहुंची.
संगीता को डिलीवरी की तारीख 2 जुलाई दी गई थी लेकिन पंद्रह दिन पहले उसे लेबर पेन शुरू हो गया. धनगरवाड़ा तक पक्की सड़क न होने की वजह से एंबुलेंस वहां पहुंच नहीं सकती थी. बांस की डोली में ही संगीता को बिठाकर पक्की सड़क तक ले जाया जा रहा था. तभी संगीता की हालत देखकर आशा सेविका और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने रास्ते में ही डिलिवरी कराने का फैसला लिया.
तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सचिन यत्नालकर ने भी इस बात की पुष्टि की कि जैसे ही महिला को घर से डोली में बिठाकर चलना शुरू हुआ, थोड़ी देर बाद ही उसने बच्ची को जन्म दिया.
संगीता का दो साल का बेटा भी है. डिलिवरी कराने वालीं आशा सेविका अर्चना बबनगिरी बुवा ने आजतक को बताया कि जब वे 100 फ़ीट करीब नीचे ही उतरे थे तो संगीता को पेट में बहुत तेज प्रैशर महसूस हुआ. इसके बाद वहीं झाड़ियों के बीच डिलिवरी हुई. तब दोपहर के ढाई बजे थे. जब एंबुलेस चालक से संपर्क किया गया तो उसने बताया कि कई जगह पानी भरा होने की वजह से एंबुलेंस को मुख्य सड़क वाली जगह तक पहुंचने में ही वक्त लगेगा. इसके बाद महिला को नवजात के साथ फिर उसी के घर ले जाया गया. वहां उन्हें कंबल में लपेट कर रखा गया. बाद में फिर उन्हें डोली में बिठा कर तीन किलोमीटर नीचे मुख्य सड़क तक ले जाया गया जिससे एंबुलेस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा सके. इस दौरान गाव के 15 लोग डोली के साथ चलते रहे.
ये घटना अपने आप में कई सवाल उठाती है. अगर एक महिला को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न होने की वजह से इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है तो इसका जवाब क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांगा जाना चाहिए. स्थानीय लोगों का यही कहना है कि वोट लेते समय विकास के लंबे चौड़े वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव निपटते ही सब भुला दिया जाता है.
सड़क, पानी, बिजली, सार्वजनिक स्वच्छता के अभाव वाले इस क्षेत्र में रहने वालों को दो वक्त की रोटी कमाने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ती है.
दीपक सूर्यवंशी का इनपुट