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MNS न होती तो 10 सीटों पर ही सिमट जाती उद्धव की सेना! विरोधी होकर भी भाई की मदद कर गए राज ठाकरे

मनसे के उम्मीदवारों ने शिंदे गुट को 8 सीटों पर निर्णायक रूप से नुकसान पहुंचाया, जिनमें से अधिकतर मुंबई की थीं. इस वजह से शिवसेना (यूबीटी) मुंबई में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही. खासकर वर्ली, माहिम और वांद्रे ईस्ट जैसी सीटें अहम साबित हुईं. अगर मनसे ने इन 10 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ा होता, तो इन सीटों पर शिंदे गुट को फायदा मिल सकता था.

उद्धव की मदद कर गये राज ठाकरे. (फोटो-आजतक) उद्धव की मदद कर गये राज ठाकरे. (फोटो-आजतक)
मुस्तफा शेख
  • नई दिल्ली,
  • 24 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अप्रत्यक्ष रूप से शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा फायदा पहुंचाया है. राज्य की 20 सीटों पर शिवसेना (यूबीटी) की जीत में से 10 सीटें ऐसी रहीं, जहां मनसे के उम्मीदवारों द्वारा जुटाए गए वोटों ने जीत का अंतर तय किया. इनमें से 8 सीटें मुंबई से थीं और 2 सीटें राज्य के अन्य हिस्सों से.

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इन 10 सीटों पर अगर मनसे उम्मीदवार चुनाव न लड़ते, तो शिवसेना (यूबीटी) की कुल सीटें घटकर केवल 10 रह जातीं. इससे एकनाथ शिंदे की शिवसेना और महायुति गठबंधन को 10 अतिरिक्त सीटें मिल जातीं, जो इस चुनाव का परिणाम पूरी तरह से बदल सकती थीं.

वो सीटें जहां UBT को मनसे के कारण मिली बढ़त
मुंबई में माहिम, वर्ली, विक्रोली, जोगेश्वरी ईस्ट, दिंडोशी, वर्सोवा, कलीना, वांद्रे ईस्ट

शेष महाराष्ट्र: वानी, गुहागर

सीटवार विश्लेषण

माहिम
मनसे उम्मीदवार: राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे
जीत का अंतर: 1,316 वोट
यूबीटी के विजेता: महेश सावंत (50,213 वोट)
मनसे के वोट: 33,062
शिंदे गुट के उम्मीदवार: सदा सरवणकर, हार गए.

वर्ली
मनसे उम्मीदवार: संदीप देशपांडे
जीत का अंतर: 8,801 वोट
यूबीटी के विजेता: आदित्य ठाकरे (63,324 वोट)
मनसे के वोट: 19,367
शिंदे गुट के उम्मीदवार: मिलिंद देवड़ा.

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विक्रोली
जीत का अंतर: 15,526 वोट
यूबीटी के विजेता: (66,093 वोट)
मनसे के वोट: 16,813.

जोगेश्वरी ईस्ट
जीत का अंतर: 1,541 वोट
यूबीटी के विजेता: (77,044 वोट)
मनसे के वोट: 64,239.

दिंडोशी
जीत का अंतर: 6,182 वोट
यूबीटी के विजेता: (76,437 वोट)
मनसे के वोट: 20,309.

वर्सोवा
जीत का अंतर: 1,600 वोट
यूबीटी के विजेता: (65,396 वोट)
मनसे के वोट: 6,752.

कलीना
जीत का अंतर: 5,008 वोट
यूबीटी के विजेता: (59,820 वोट)
मनसे के वोट: 6,062.

वांद्रा ईस्ट
जीत का अंतर: 11,365 वोट
यूबीटी के विजेता: (57,708 वोट)
मनसे के वोट: 16,074.

वानी
जीत का अंतर: 15,560 वोट
यूबीटी के विजेता: (94,618 वोट)
मनसे के वोट: 21,977.

गुहागर
जीत का अंतर: 2,830 वोट
यूबीटी के विजेता: (71,241 वोट)
मनसे के वोट: 6,712.

यूबीटी को मुंबई में उपस्थिति बनाए रखने में मदद
मनसे के उम्मीदवारों ने शिंदे गुट को 8 सीटों पर निर्णायक रूप से नुकसान पहुंचाया, जिनमें से अधिकतर मुंबई की थीं. इस वजह से शिवसेना (यूबीटी) मुंबई में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही. खासकर वर्ली, माहिम और वांद्रे ईस्ट जैसी सीटें अहम साबित हुईं. अगर मनसे ने इन 10 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ा होता, तो इन सीटों पर शिंदे गुट को फायदा मिल सकता था. इससे शिवसेना (यूबीटी) की कुल सीटें घटकर 10 रह जातीं. महायुति गठबंधन की सीटें 230 से बढ़कर 240 हो जातीं.

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राज ठाकरे की पार्टी की यह अप्रत्यक्ष भूमिका महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है. मनसे का प्रदर्शन शिंदे गुट के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ. यह भी दिखाता है कि मनसे भले ही चुनाव में अधिक सीटें न जीत पाई हो, लेकिन उनका प्रभाव अभी भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है. आने वाले समय में, मनसे की यह भूमिका महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है.

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