
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर कब्जे की जंग तेज हो गई है. दोनों गुटों के बीच शक्ति परीक्षण देखने को मिल रहा है. एक दिन पहले शरद पवार और अजित पवार गुट ने अलग-अलग बैठकें बुलाई थीं, जिसमें अजित गुट ने बढ़त हासिल की है. दो जुलाई को बगावत के बाद दोनों गुट अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं. शरद पवार के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं. उनके सामने पार्टी, सिंबल और विधायकों को साधने की चुनौती है. जबकि अजित गुट लगातार पार्टी, विधायकों और सिंबल पर दावा मजबूत करते देखा जा रहा है. जानकारों का कहना है कि एनसीपी में बगावत की पटकथा काफी पहले लिखी जा चुकी थी. इसकी हाईकमान तक को भनक नहीं लगने दी गई. यहां तक कि 30 जून को एक बैठक में अजित पवार को एनसीपी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया था. जानिए बगावत से दो दिन पहले की कहानी...
दरअसल, अजित पवार गुट ने चुनाव आयोग में दावा किया गया है कि वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. सूत्रों के मुताबिक, 30 जून को एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक बैठक बुलाई थी. ये बैठक बेहद सीक्रेट रखी गई थी. इस बैठक में एक प्रस्ताव रखा गया, जिसमें लिखा गया कि आम राय से शरद पवार को हटाकर अजित पवार को एनसीपी का नया अध्यक्ष चुने जाने का फैसला लिया गया है. बैठक में यह प्रस्ताव पास कर दिया गया. इतना ही नहीं, अजित गुट ने उसी दिन चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा और पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा ठोक दिया.
कार्यकारिणी की बैठक में जो प्रस्ताव रखा गया, उसमें लिखा गया था कि NCP लोगों के कल्याण के उद्देश्य से दूर जा रही है, ऐसे में शरद पवार की जगह अजित पवार को अध्यक्ष चुना जाता है. अजित गुट ने 30 जून को मुंबई में कार्यकारिणी की बैठक होने के बारे में जानकारी दी.
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चुनाव आयोग से दोनों गुटों ने क्या कहा?
NCP के नाम और सिंबल पर दावे को लेकर अजित और शरद पवार दोनों गुट चुनाव आयोग पहुंच गए हैं. बगावत के बाद शरद पवार गुट ने अर्जी लगाई थी. इसमें कहा गया कि कोई भी एनसीपी पर अपने आधिपत्य का दावा आयोग के सामने करे तो आयोग शरद पवार पक्ष को भी जरूर सुने. इसके कुछ घंटे बाद अजित पवार गुट ने चालीस से ज्यादा विधायकों के शपथ पत्र के साथ पार्टी पर दावा ठोका. अजित पवार गुट ने हलफनामे में चालीस से ज्यादा विधायकों/सांसदों और MLC के दस्तखत होना बताया है. हालांकि, बुधवार को उनकी मीटिंग में 31 ही विधायक पहुंचे थे. अजित का कहना था कि कुछ विधायक शहर से बाहर हैं. इसलिए वो बैठक में शामिल नहीं हो पाए हैं.
वहीं, शरद पवार गुट ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई कि कोई भी अगर एनसीपी पर अपने अधिकार और नाम निशान पर दावा करे तो आयोग उनकी दलीलें भी सुने. पवार गुट ने पार्टी में बगावत कर दल-बदल करने वाले अपने विधायकों की जानकारी भी आयोग को दी. आयोग को ये भी बताया गया है कि सत्ताधारी गठबंधन में मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले बागी विधायकों को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है. साथ ही अजित के साथ मंत्री बनाए गए पार्टी के 9 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की. फिलहाल, आयोग ने दोनों पक्षों से अपने समर्थन में दस्तावेज पेश करने के लिए कहा है.
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'चुनाव चिह्न और पार्टी नहीं जाने देंगे'
शरद ने अपने समर्थकों को आश्वासन दिया कि वो किसी को भी पार्टी या सिंबल छीनने का मौका नहीं देंगे. उन्होंने कहा, अगर वे वहां (चुनाव आयोग) गए हैं तो वे मेरी तस्वीर का उपयोग क्यों कर रहे हैं? मैं अपना चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम उनके हाथ में नहीं जाने दूंगा. अभी कुछ दिन पहले, उन्होंने (अजित पवार) मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का मजाक उड़ाया था और कहा था- उन्होंने इतने सालों में ऐसा सीएम नहीं देखा है, लेकिन आज वे उनके साथ जुड़ गए हैं.
'शरद साहब पिता की तरह, फैसला लेना कठिन'
NCP पार्टी में अभी कुछ विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अजित या शरद किसी का दामन नहीं थामा है. इसमें से एक सरोज अहीरे का बयान आया है. उन्होंने कहा, मैं अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं से बात करूंगी. मैं अजित पवार और शरद पवार दोनों से मिली हूं लेकिन अभी कोई फैसला नहीं किया है. पवार साहब पिता की तरह हैं. दूसरी तरफ अजित दादा ने मेरे क्षेत्र में मेरा बहुत साथ दिया है. दोनों के बीच में से किसी एक को चुनना आसान नहीं है. इतने स्ट्रेस के चलते मैं बीमार हो गई. अजित दादा ने जो पेपर दिया उसपर बिना पढ़े साइन किया था. अभी आखिरी फैसला अपने लोगों से बात करके लूंगी.
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शरद ने दिल्ली में बुलाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक
महाराष्ट्र के राजनीतिक ड्रामा के बीच शरद पवार ने अब दिल्ली में NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है. ये मीटिंग आज दोपहर 3 बजे होगी. पवार आज सुबह दिल्ली पहुंचेंगे.
बता दें कि एनसीपी के कुल 53 विधायक हैं. कुछ विधायक अब तक किसी गुट में शामिल नहीं हुए हैं. अजित गुट को पार्टी पर कब्जे के लिए दो तिहाई यानी 36 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है. हालांकि, बुधवार को बैठक में 53 में से 32 विधायक ही शामिल हुए हैं. वहीं, शरद गुट की बैठक में 18 विधायक, एमएलसी शामिल हुए.
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अजित पवार ने मीटिंग में चाचा शरद पवार पर तंज कसा और खुद को सीएम बनने की महत्वाकांक्षा भी जाहिर की. अजित ने कहा, पवार साहब आप 83 साल के हो गए हैं. आप कभी रुकेंगे या नहीं. हम सरकार चला सकते हैं. हम में ताकत है. फिर हमें मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है. किसी भी घर में 60 साल के बाद रिटायर होते हैं और आशीर्वाद देने का काम करते हैं. फिर आप ऐसा क्यों नहीं करते?
'गाड़ी वहीं रुक जाती है, आगे नहीं बढ़ती'
अजित ने कहा, मैं पांच बार डिप्टी सीएम पद की शपथ ले चुका. यह एक रिकॉर्ड है लेकिन गाड़ी वहीं रुक जाती है, आगे नहीं बढ़ती. मैं दिल से महसूस करता हूं कि मुझे राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहिए. मेरे पास कुछ चीजें हैं जिसे मैं लागू करना चाहता हूं और इसके लिए प्रमुख (सीएम) बनना जरूरी है.
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'सीएम बनने की महत्वाकांक्षा जताते आए हैं अजित'
63 वर्षीय अजीत पवार ने कभी भी अपनी मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षाओं को छिपाया नहीं है. वे कई मौकों पर खुलकर सीएम बनने की बात करते आए हैं. माना जा रहा है कि गठबंधन में अजित की एंट्री से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की परेशानियां बढ़ सकती हैं. फिलहाल, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन सरकार को एक साल पूरा हो गया है. इस सरकार में बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री हैं.
पिता के खिलाफ बयानबाजी बर्दाश्त नहीं: सुप्रिया
24 साल पुरानी पार्टी में बगावत के बाद शरद पवार ने पहली बार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. उन्होंने अपने भतीजे पर हमला किया. शरद पवार की बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने अपने बागी चचेरे भाई अजित पवार पर पलटवार किया और कहा, वो अपने पिता के खिलाफ बोला गया एक भी शब्द बर्दाश्त नहीं करेंगी. कोई मेरी या किसी अन्य व्यक्ति की आलोचना कर सकता है, लेकिन मैं अपने पिता के खिलाफ इसे बर्दाश्त नहीं करूंगी. वो पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए पिता से भी बढ़कर हैं. हम बेटियां उन बेटों से कहीं बेहतर हैं जो अपने पिता को घर बैठने के लिए कहते हैं.
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इससे पहले अजीत पवार ने 2004 में महाराष्ट्र में एनसीपी का मुख्यमंत्री बनाने का मौका गंवाने के लिए चाचा को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, 2004 में हमारे पास कांग्रेस की तुलना में ज्यादा विधायक थे, लेकिन हमारे वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस को मुख्यमंत्री बनने दिया.