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महाराष्ट्र पर क्या है शिवसेना-BJP के मन की बात, एक साल में कितने बदले हालात?

महाराष्ट्र में संजय राउत और पूर्व सीएम फडणवीस की मुलाकात को भले ही औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल इसे राजनीतिक नजर से देख रहे हैं. पाटिल ने सोमवार को कहा कि जब दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के दो बड़े नेता मिलते हैं, तो जाहिर तौर पर चाय-बिस्कुट पर तो चर्चा नहीं हुई होगी बल्कि ऐसी मुलाकातों में राजनीति की ही चर्चा होती है.

उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो) उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST
  • संजय राउत और फडणवीस के बीच मुलाकात
  • शरद पवार भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिले थे
  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के बयान के सियासी मायने

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार के नवंबर के महीने में एक साल पूरे हो रहे हैं. ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना सांसद संजय राउत के बीच हुई मुलाकात के बाद से राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. यह मुलाकात अहम मानी जा रही है, क्योंकि अगले ही दिन एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बाला साहब थोराट तक ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ मुलाकात की थी. 

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संजय राउत और पूर्व सीएम फडणवीस के साथ हुई मुलाकात को भले ही औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल इसे राजनीतिक नजर से देख रहे हैं. पाटिल ने सोमवार को कहा कि जब दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के दो बड़े नेता मिलते हैं, तो जाहिर तौर पर चाय-बिस्कुट पर तो चर्चा नहीं हुई होगी बल्कि ऐसी मुलाकातों में राजनीति की ही चर्चा होती है. 

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत के बीच हुई मुलाकात पॉलिटिकल थी, लेकिन यह बैठक अनिर्णायक थी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कोई भी मध्यावधि चुनाव नहीं चाहता है. लेकिन अस्थिरता से बाहर निकलने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं है. एक अच्छी सुबह होगी तो सब कुछ बदल जाएगा. 

बता दें कि देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की मुलाकात मुंबई के एक होटल में हुई थी. इस मुलाकात को दोनों नेताओं ने गुप्त रखा था. फडणवीस ने कहा था कि संजय राउत ने 'सामना' के लिए एक इंटरव्यू के सिलसिले में ही मुलाकात की. यही बात संजय राउत भी कह रहे हैं कि सामान्य मुलाकात थी. राउत ने कहा था कि वह महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता हैं और बिहार चुनाव के लिए बीजेपी प्रभारी हैं. हमारे आपस में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम आपस में दुश्मन नहीं हैं. 

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हालांकि, देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत के बीच मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में सियासी अटकलें तेज हो गई हैं. लोग सत्ता परिवर्तन की चर्चा करने लगे हैं. चंद्रकांत पाटिल के इस बयान में राजनीतिक मकसद साफ नजर आ रहा है. वहीं, बीजेपी के सहयोगी और मोदी सरकार में मंत्री रामदास अठावले तो बीजेपी-शिवसेना को सरकार बनाने का फॉर्मूला भी सुझा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिवसेना-बीजेपी को महाराष्ट्र में 50-50 फॉर्मूले पर सरकार बनाना चाहिए. शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री रहने के बाद बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा केंद्र में भी शिवसेना के लोगों को कैबिनेट में जगह दी जानी चाहिए. 

दरअसल, पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना ने बीजेपी से नाता तोड़कर अपने वैचारिक विरोधी माने जाने वाले एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. तीनों पार्टियों ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी नाम से राज्य में गठबंधन की सरकार बनाई है, जिसमें सत्ता की कमान उद्धव ठाकरे के हाथ में है. हालांकि, पिछले एक साल में कई बार कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के बीच मतभेद की खबरें आई हैं. 

महाराष्ट्र की सत्ता संभाले हुए उद्धव ठाकरे को दस महीने से ज्यादा होने जा रहे हैं. इन दस महीनों में ऐसे कई मौके आए जब शिवसेना को समर्थन की सबसे ज्यादा दरकार थी, लेकिन सहयोगी दल हर बार कन्नी काटते नजर आए. कोरोना से लेकर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के मामले पर शिवसेना अकेले खड़ी थी. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की गठबंधन सरकार में सहयोगी दल कांग्रेस-एनसीपी ने कोरोना की रफ्तार से लेकर कंगना विवाद पर पल्ला झाड़ लिया और शिवसेना के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में महाराष्ट्र में अगर बीजेपी और शिवसेना साथ आते हैं तो कोई अचरज नहीं होगा, क्योंकि 25 साल तक दोनों एक साथ रह चुके हैं. 

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