
महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिवसेना बनाम शिवसेना मामले में विधायकों की अयोग्यता संबंधी याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है. उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत में कल सुनवाई होगी. उन्होंने तर्क दिया है कि मामले में 2 लाख 71 हजार से अधिक पृष्ठों के दस्तावेज दाखिल किए गए हैं, विधानसभा सत्र भी चल रहा है, ऐसे में मुझे अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय के लिए और तीन सप्ताह की आवश्यकता होगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेने के लिए 30 दिसंबर की डेडलाइन तय की थी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 30 अक्टूबर 2023 को हुई सुनवाई में महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर को 30 दिसंबर तक अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने का स्पष्ट निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था, 'हम नहीं चाहते कि मामला अगले चुनाव तक लटका रहे. अगर स्पीकर सुनवाई नहीं कर सकते तो हम करेंगे. हमने बार-बार स्पीकर से फैसला लेने के लिए कहा है'. यह मामला शिवसेना से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे और उनके गुट के 33 विधायकों के खिलाफ है. उद्धव गुट ने इन विधायकों पर दल बदल कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए इनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए स्पीकर के पास याचिका दायर की है.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में क्या कहा था?
भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है अयोग्यता याचिकाओं को निष्प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तरफ से दलील दी गई थी कि दीवाली और क्रिसमस की छुट्टियां आएंगी और इस दौरान शीतकालीन सत्र भी आएगा. इस पर सीजेआई ने कहा था कि अगर इन याचिकाओं पर स्पीकर सुनवाई नहीं कर सकते तो हम निर्णय लेंगे. उन्होंने कहा कि यह कार्यवाही तब तक नहीं चल सकती जब तक अगले चुनाव घोषित न हो जाएं और उन्हें निष्प्रभावी न कर दें.
विधायकों की अयोग्यता का मामला क्या है?
शिवसेना (यूबीटी) ने एकनाथ शिंदे और उनके गुट के 33 विधायकों के खिलाफ अयोग्य संबंधी याचिका दायर की थी. इन विधायकों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर महाविकास अघाड़ी की सरकार गिरा दी थी. इसके चलते शिवसेना में भी टूट हुई. पार्टी पर दावे का मामना निर्वाचन आयोग के पास पहुंचा. ईसी ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना और पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह उसे एलॉट कर दिया. इसके बाद उद्धव गुट ने अपनी पार्टी का नाम शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और निशान 'जलती मशाल' रखा.
एकनाथ शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि विधायकों को अयोग्य घोषित कराने के लिए उद्धव गुट की ओर से जो दस्तावेज दिए गए हैं, वे कथित तौर पर फर्जी हैं. महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेते हैं तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित उनके गुट के 33 विधायकों की किस्मत का फैसला होगा. साथ ही मौजूदा महाराष्ट्र सरकार का भी भविष्य तय होगा.