
महाराष्ट्र के पुणे में उस शख्स को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी. जिसे अपनी पत्नी की आत्महत्या के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. बता दें, संतोष सुदाकर शिलिमकर ( 32 उम्र) किसान और रेत ठेकेदार का काम करता था. उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) और 498ए (क्रूरता) के तहत दोषी पाया गया था. शिलिमकर की पत्नी ने जुलाई 2012 में शादी के आठ साल बाद आत्महत्या कर ली थी.
पुलिस के मुताबिक शिलिमकर ने अपनी पत्नी और छोटी बेटी को एक रात घर के बाहर निर्वस्त्र खड़ा कर दिया था. यह घटना तब हुई जब शिलिमकर ने अपनी पत्नी से दोस्तों के लिए खाना बनाने को कहा और दोनों के बीच झगड़ा हो गया. पीड़िता ने यह बात अपने परिवार को फोन पर बताई थी. बार-बार होने वाले शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर महिला ने घर के पास के कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी थी.
पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया
पुणे के सत्र न्यायालय ने अगस्त 2024 में शिलिमकर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि शिलिमकर के वकील सत्यव्रत जोशी ने अदालत में तर्क दिया कि मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है और प्रत्यक्ष सबूत या आत्महत्या नोट नहीं है. वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया था.
बंबई हाईकोर्ट ने दी जमानत
जस्टिस आरएन लढ़ा की बेंच ने यह कहते हुए जमानत दी कि अपील जल्द नहीं सुनी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने ₹25,000 के निजी मुचलके पर सजा निलंबित कर दी.