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महिला कॉर्पोरेटर को अभद्र मैसेज भेजने का मामला, सेशन कोर्ट ने दोषी की सजा को रखा बरकरार

मुंबई सेशन्स कोर्ट ने 9 साल पहले एक महिला कारपोरेटर को अभद्र संदेश भेजने वाले शख्स की सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. अदालत ने पाया कि संदेश और तस्वीरें अश्लील थीं, और कोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज कर दिया.

प्रतिकात्मक तस्वीर (Image - India Today) प्रतिकात्मक तस्वीर (Image - India Today)
विद्या
  • मुंबई,
  • 21 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:19 PM IST

मुंबई सेशन्स कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए एक शख्स की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा, जिसने 9 साल पहले एक महिला कारपोरेटर को अभद्र संदेश भेजे थे. यह मामला 26 जनवरी 2016 का है जब उस समय की महिला कारपोरेटर ने अपने मोबाइल पर 20 से 25 अश्लील संदेश देखे थे.

प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, घटना की रात 11:30 बजे महिला ने अपने फोन पर अज्ञात नंबर से कई संदेश पाया जिनमें उसकी तारीफ से लेकर निजी सवाल थे. इसके अतिरिक्त, तुलना में कुछ संदेश अभद्र और अश्लील भी थे. यह फोन नंबर BMC द्वारा प्रदान किया गया था और यह कई लोगों के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था.

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जब महिला के पति ने किया था नंबर पर फोन

महिला ने अपने पति को इसकी जानकारी दी, जो खुद भी एक पूर्व कारपोरेटर हैं. उन्होंने जब उस नंबर पर कॉल किया तो कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन जल्द ही और संदेश भेजे गए. इसके बाद मामले में उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.

अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिया था ये फैसला

मामला अदालत पहुंचा, जहां अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपी को तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया. जुर्माने के भुगतान में विफल होने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. साथ ही, 3,000 रुपये का हर्जाना कारपोरेटर को अदा करने का आदेश दिया गया है.

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आरोपी नरसिंघ भुजंगराव गुडे नांदेड़ के रहने वाले हैं और मुंबई के मुलुंड क्षेत्र में रहते थे. उन्होंने दावा किया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते झूठा है. हालांकि, जज डीजी धाबोल ने इन दावों को सबूत की कमी के आधार पर खारिज कर दिया.

मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को सेशन कोर्ट ने रखा बरकरार

जज ने “औसत व्यक्ति की समकालीन सामुदायिक मानकों” के संदर्भ में अश्लीलता की धारणा पर जोर देते हुए पाया कि देर रात भेजे गए संदेश असल में अश्लील थे. आरोपी ने यह तर्क दिया कि तस्वीरें किसी अखबार में प्रकाशित हुई थी, जिसे जज ने अस्वीकार कर दिया. सेशन्स कोर्ट ने आरोपी गुडे द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, और याचिका खारिज कर दी अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला बरकरार रखा.

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