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लता मंगेशकर को यादकर भावुक हुए PM मोदी, बोले- दशकों बाद पहली बार दीदी राखी पर नहीं होंगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लताजी के परिवार से जुड़ने का किस्सा भी सुनाया. मोदी ने बताया कि सुधीर फड़के ने लता दीदी से मेरा परिचय कराया था. इसके बाद इस परिवार से मैं जुड़ गया.

aajtak.in
  • मुंबई,
  • 24 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 11:55 PM IST
  • लता मंगेशकर के पिता की 80वीं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम
  • लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार की शुरुआत की गई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को मुंबई में लता दीनानाथ मंगेशकर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. यह अवॉर्ड लता मंगेशकर के पिता मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की 80वीं पुण्यतिथि पर दिया गया. इस दौरान पीएम मोदी लताजी को याद कर भावुक नजर गए. उन्होंने लताजी के कार्यों को गिनाया और कहा कि ऐसा पहली बार होगा, जब लताजी राखी में नहीं होंगी. उन्होंने बॉलीवुड की पांच पीढ़ियों तक आवाज दी. 

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पीएम मोदी ने आइकोनिक सिंगर को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न बताया और एक आर्टिस्ट के रूप में याद किया. बता दें कि पीएम मोदी लताजी को अपनी बड़ी बहन मानते थे. मोदी ये अवॉर्ड पाने वाले पहले शख्स हैं. लता मंगेशकर का फरवरी में 92 साल की उम्र में मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के बाद निधन हो गया था.

मोदी ने अवॉर्ड को देश के लिए समर्पित किया

कार्यक्रम में पीएम मोदी ने लताजी के परिवार से जुड़ने का किस्सा भी सुनाया. मोदी ने बताया कि सुधीर फड़के ने लता दीदी से मेरा परिचय कराया था. इसके बाद इस परिवार से मैं जुड़ गया. लता दीदी सुर सम्राट के साथ साथ मेरी बड़ी बहन थीं. लता दीदी से मुझे हमेशा अपार प्रेम मिला है. कई दशकों बाद ऐसा पहली बार होगा, जब राखी पर लता दीदी नहीं होंगी. मैं इस अवॉर्ड को सभी देशवासियों के लिए समर्पित करता हूं. लता दीदी से अक्सर मेरी बातचीत होती थी. 

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लताजी ने 80 साल से ज्यादा तक आवाज दी

पीएम ने कहा कि लताजी ने आने वाली पीढ़ियों को प्रेम और करुणा की भाषा सिखाई. मैं भाग्यशाली महसूस करता हूं कि उन्होंने मुझे एक बड़ी बहन की तरह प्यार किया. उन्होंने कहा कि ग्रामोफोन, सीडी, डीवीडी, पेन ड्राइव, डिजिटल म्यूजिक से लेकर एप्स के युग तक लता मंगेशकर की आवाज ने 80 से ज्यादा वर्षों तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया.

लताजी ने आजादी से पहले भी भारत को आवाज दी

पीएम का कहना था कि गीतों और दुनिया की यात्रा लता दीदी की यात्रा के जरिए चली. उन्होंने एक्टर्स की पांच पीढ़ियों को आवाज दी और भारत को गौरवान्वित किया. यहां उनकी यात्रा उस समय समाप्त हुई, जब हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. उन्होंने आजादी से पहले भी भारत को आवाज दी थी. देश की 75 साल की यात्रा हमेशा उनके 'सुर' से जुड़ी हुई थी. हमारा पूरा देश मंगेशकर परिवार के योगदान के प्रति आभारी है. गायन के अलावा उनके भीतर जो 'राष्ट्र भक्ति' का जुनून था, वह उनके पिता के कारण था.

मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान चैरिटेबल ट्रस्ट के अनुसार, लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार हर साल उस शख्स को दिया जाएगा, जिसने राष्ट्र और समाज के लिए अग्रणी और अनुकरणीय योगदान दिया है. 

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