
पुणे में एक सेवानिवृत्त सरकारी बैंक कर्मचारी से 2.3 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. साइबर ठगों ने बीमा कंपनी के एजेंट बनकर बेहतर रिटर्न का लालच दिया. इसके बाद जीएसटी, आयकर और अन्य शुल्क के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ ली. पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने मामले की जांच के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को बीमा कंपनी और वित्तीय संस्थानों से जुड़ा अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त सरकारी महिला बैंक कर्मचारी को झांसे में लिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी बीमा पॉलिसी से अधिक रिटर्न मिलेगा, लेकिन इसके लिए जीएसटी, आयकर, टीडीएस आदि शुल्कों का भुगतान करना होगा.
महिला जब आरोपियों की बातों में आ गई, तो धीरे-धीरे उनसे 2.3 करोड़ रुपये ठग लिए गए. पीड़िता ने ठगी का अहसास होते ही पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस इंस्पेक्टर रविकिरण नाले की टीम ने जांच शुरू की.
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छानबीन के बीच पुलिस ने लक्ष्मण कुमार पुनारामजी प्रजापति को पुणे से गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता चला कि 1.5 करोड़ रुपये दिल्ली में अन्य आरोपियों तक पहुंचे. इसके बाद साइबर पुलिस की दो टीमें दिल्ली रवाना हुईं और भूपेंद्र जीवन सिंह जिन्ना और लक्ष्मण सिंह को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तार आरोपियों के पास से 10 लाख रुपये नकद और एक मनी काउंटिंग मशीन बरामद हुई, साथ ही, पुलिस को एनपीआई अधिकारी का फर्जी आईडी कार्ड भी मिला, जिससे इस गिरोह के बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करने की आशंका जताई जा रही है.
पुलिस को संदेह है कि दिल्ली के आरोपी सिर्फ मोहरे हैं और इसके पीछे एक संगठित साइबर ठग गिरोह सक्रिय हो सकता है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह गैंग देशभर में अन्य लोगों को भी इसी तरह ठग चुका है. फिलहाल, तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.