
पुणे में पोर्श कार हादसे में आरोपी नाबालिग के पिता और कारोबारी विशाल अग्रवाल पर स्याही फेंके जाने का मामला सामने आया है. घटना के वक्त पुलिस पेशी के लिए विशाल को कोर्ट लेकर जा रही थी. इस बीच एक संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ता पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे. इन कार्यकर्ताओं के हाथों में संगठन से जुड़ा झंडा भी था.
जानकारी के मुताबिक, दोपहर में पुलिस जैसे ही विशाल को सत्र न्यायालय ले जाने के लिए निकली तो रास्ते में एक संगठन से जुड़े लोगों ने विशाल पर स्याही फेंक दी. कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और पुलिस वैन को रोकने की कोशिश की. मौके पर पुलिस ने मोर्चा संभाला और भीड़ को हटाया. उसके बाद पुलिस वैन आगे बढ़ गई.
बता दें कि पुणे पुलिस ने मंगलवार को विशाल अग्रवाल को छत्रपति संभाजी नगर से गिरफ्तार किया था. विशाल की आज कोर्ट में पेशी है.
क्या है पूरा मामला
बताते चलें कि पुणे में 17 साल के लड़के ने तीन दिन पहले शराब के नशे में अपनी पोर्शे कार से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था. हादसे में दोनों (लड़का-लड़की) की मौत हो गई थी. मरने वालों की पहचान अनीश अवधिया (24 साल) और अश्विनी कोष्टा (24 साल) के रूप में हुई है. दोनों मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और पुणे में काम करते थे. इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी नाबालिग को रिहा कर दिया. पुलिस ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें बार के दो मैनेजर, बार का मालिक, होटल कर्मचारी और आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल का नाम शामिल है.
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पुलिस क्यों बाल सुधार गृह भेजने की मांग कर रही?
आरोपी नाबालिग को भी आज जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया. इस मामले में JJ बोर्ड ने सुनवाई के बाद सुरक्षित रख लिया है. दरअसल, पुणे पुलिस का कहना है कि अपराध जघन्य है, इसलिए दोषियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस ने इस मामले में सत्र न्यायालय में भी याचिका दायर की थी और नाबालिग की जमानत का विरोध किया था. हालांकि, सत्र न्यायालय ने किशोर न्याय बोर्ड में रिव्यू पिटीशन के लिए निर्देश दिए. उसके बाद मंगलवार को पुलिस ने JJ बोर्ड में रिव्यू पिटीशन दायर की. इस मामले में पुलिस ने आरोपी नाबालिग को भी सुनवाई के दौरान पेश होने के लिए नोटिस दिया था.
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पुणे पुलिस ने मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड में जो रिव्यू पिटीशन दायर की है, उसमें किशोर को ऑब्जर्वेशन होम भेजने की मांग की है. किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 के अनुसार, पुणे पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष रिव्यू पिटीशन में कहा है कि आरोपी नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेजा जाए या फिर रिमांड पर दिया जाए. इस याचिका पर बुधवार को फिर से बहस होगी. पुणे पुलिस मांग कर रही है कि किशोर को उसके माता-पिता की निगरानी से दूर किया जाए. क्योंकि माता-पिता उस पर नजर रखने में विफल रहे हैं. पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर की धारा 75 (उपेक्षा) और 77 (नशीला पदार्थ देना या उस तक पहुंच होना) का हवाला भी दिया.
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