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बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द की बलात्कार की FIR, महिला से कभी न मिलने का वादा बना वजह

आरोपी के वकील खान ने तब तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष महिला का बयान आरोपी द्वारा दायर अग्रिम जमानत के आवेदन के लंबित रहने के दौरान दिया गया था. वकील ने कहा कि हालांकि, अभी शिकायतकर्ता अदालत में मौजूद है और उसे FIR रद्द करने में कोई आपत्ति नहीं है.

बॉम्बे हाई कोर्ट से FIR रद्द बॉम्बे हाई कोर्ट से FIR रद्द
विद्या
  • मुंबई,
  • 03 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 6:52 PM IST

बॉम्बे हाई कोर्ट से एक शादीशुदा व्यक्ति को बलात्कार के केस में राहत मिल गई. कोर्ट में महिला ने कहा कि उसने सहमती से संबंध बनाए थे, इसलिए FIR को रद्द करने में उसे कोई आपत्ति नहीं है. इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने FIR को रद्द कर दिया. जस्टिस पीडी नाइक और एनआर बोरकर की पीठ ने आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की. आरोपी के खिलाफ 3 फरवरी, 2024 को पुणे ग्रामीण के लोनावाला पुलिस स्टेशन में बलात्कार, आपराधिक धमकी और जहर देकर चोट पहुंचाने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी. महिला को जब पता चला कि आरोपी शादीशुदा है तो उसने FIR दर्ज करा दी. जब आरोपी ने वकील सना रईस खान के जरिए बॉम्बे हाई कोर्ट में एफआईआर को चुनौती दी तो महिला भी कोर्ट में पेश हुई और हलफनामा दाखिल किया.

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हलफनामे में महिला ने कहा कि उसके और आरोपी के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता हो गया है और इसलिए वह FIR में लगाए गए अपने सभी आरोप वापस ले रही है. उसने कहा कि FIR रद्द करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है.

दोनों ने किया समझौता
अपनी वकील रुचिता राजपुरोहित के माध्यम से महिला ने कहा कि उसे अपनी सुरक्षा की चिंता है. आरोपी की पत्नी और मां ने सौहार्दपूर्ण समझौते की शर्तों के तहत उसे आश्वासन दिया कि न तो वे और न ही आरोपी भविष्य में उससे संपर्क करेंगे या उसे किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. आरोपी के वकील खान ने एक हलफनामा भी दायर किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी और महिला के बीच मुद्दों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो आरोपी और न ही उसके परिवार के सदस्यों ने उसे किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी. 

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पीठ ने दोनों हलफनामे स्वीकार कर लिए. अतिरिक्त लोक अभियोजक एएस शालगांवकर ने बताया कि जांच के दौरान मजिस्ट्रेट के सामने महिला का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें उसने कहा था कि आरोपी उस पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डाल रहा था.

आरोपी के वकील खान ने तब तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष महिला का बयान आरोपी द्वारा दायर अग्रिम जमानत के आवेदन के लंबित रहने के दौरान दिया गया था. वकील ने कहा कि हालांकि, अभी शिकायतकर्ता अदालत में मौजूद है और उसे FIR रद्द करने में कोई आपत्ति नहीं है. पीठ ने इस पर सहमति व्यक्त की और दोनों पक्षों के बीच समझौते को देखते हुए विवादित FIR को रद्द कर दिया.

इस मामले में आरोपी को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उसने FIR को तुरंत रद्द करने के लिए एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उसे गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी गई थी. पीठ ने आरोपी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे 17 अप्रैल तक एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया जेनरेशन नेक्स्ट को भुगतान करना होगा.

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