
महाराष्ट्र में सातारा (Satara) के कराड़ तहसील के गांव वडगांव की नीलम तानाजी शिंदे (Neelam Shinde) के परिवार के लिए पिछले दस दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे. अमेरिका में हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल नीलम अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, लेकिन उसके माता-पिता और परिजन उससे मिलने तक नहीं जा सकते थे. वजह थी पासपोर्ट और वीजा की दिक्कत. इस बीच, जब मामला सुर्खियों में आया तो महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई.
नीलम के पिता आनंद शिंदे ने बेटी की हालत जानने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अमेरिका जाने की हरसंभव कोशिश की. उन्होंने सरकार, नेताओं और सामाजिक संगठनों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला. दस दिनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी कोई ठोस मदद नहीं मिल रही थी. नीलम का परिवार मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद परेशान था.
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यह खबर जब मीडिया की सुर्खियों में आई तो सरकार तुरंत हरकत में आ गई. महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल संबंधित विभागों को निर्देश दिए. प्रशासन ने आनन-फानन में नीलम के पिता और परिवार के सदस्यों को मुंबई बुलाकर वीजा और पासपोर्ट से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करवाईं. अब वे अमेरिका के लिए रवाना हो चुके हैं और जल्द ही अपनी बेटी से मिल सकेंगे. नीलम के पिता आनंद शिंदे, भाई गौरव कदम और मामा संजय कदम ने कहा कि अगर मदद नहीं मिलती तो शायद अभी भी वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे होते और उनकी बेटी अमेरिका में अकेली दर्द सह रही होती.
क्या है पूरी कहानी?
दरअसल, सातारा जिले के कराड़ तहसील के वडगांव (उंब्रज) गांव की नीलम तानाजी शिंदे 14 फरवरी को अमेरिका में एक सड़क हादसे का शिकार हो गई थी. इस दुर्घटना में उसे सिर, दोनों हाथों, पैरों और सीने में गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. अस्पताल द्वारा परिजनों को तुरंत अमेरिका आने के लिए सूचित किया गया, लेकिन वीजा और पासपोर्ट संबंधी तकनीकी परेशानियों के कारण नीलम के पिता को अब तक अमेरिका जाने की अनुमति नहीं मिल पाई थी. परिवार ने केंद्रीय मंत्री और स्थानीय नेताओं से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी. इस स्थिति में बेटी से मिलने की बेबसी और चिंता के कारण परिजनों की हालत खराब हो गई थी.