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मंदी के लिए केंद्र जिम्मेदार, लॉकडाउन-नोटबंदी ने बिगाड़े हालात: शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में शुक्रवार को कहा कि राज्यों को महामारी के दौरान हुए नुकसान को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता की भीख मांगनी पड़ रही है. अर्थव्यवस्था में मंदी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है.

संजय राउत के साथ उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो-PTI) संजय राउत के साथ उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो-PTI)
मुस्तफा शेख
  • मुंबई,
  • 18 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:35 AM IST

अर्थव्यवस्था और जीएसटी के मसले पर शिवसेना ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में शुक्रवार को कहा कि राज्यों को महामारी के दौरान हुए नुकसान को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता की भीख मांगनी पड़ रही है. शिवसेना ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था में मंदी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है.

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शिवसेना ने कहा कि बिना प्लान लगाए गए लॉकडाउन और नोटबंदी जैसे कदमों ने अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है. पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन के बाद से देश में अनिश्चिचतता और अराजकता है. केंद्र सरकार, राज्यों के आर्थिक बोझ को साझा करने से कतरा रही है. केंद्र सरकार को राज्यों की यथासंभव मदद करनी चाहिए.

पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सामना में शिवसेना लिखा कि जब मनमोहन सिंह पीएम थे, तब गुजरात को मदद मिली थी. गौरतलब है कि कोरोना और लॉकडाउन की वजह से राज्यों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई. वह लगातार आर्थिक पैकेज और जीएसटी के बकाए की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अभी मदद का ऐलान नहीं किया गया है.

शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र ने अपनी आय का स्रोत बढ़ाकर केंद्र को मजबूत किया. केंद्र की तिजोरी में लगभग 22 प्रतिशत राशि अकेले मुंबई से ही जाती रहती है, लेकिन आज महाराष्ट्र और अन्य राज्यों को केंद्र मदद करने के लिए तैयार नहीं है. महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश को कोविड का बड़ा झटका लगा है.

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शिवसेना के मुताबिक, ये पांच राज्य देश के सकल घरेलू उत्पाद का 45 प्रतिशत भार उठाते हैं, लेकिन कोरोना और उसके बाद लॉकडाउन के कारण इन 5 राज्यों को 14.4 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है. यह आंकड़ा केवल पांच राज्यों का होगा तो पूरे देश का कितना नुकसान हुआ होगा! ये आंकड़े धक्कादायक साबित होंगे. जीडीपी धराशायी होकर गिरी ही है. 

शिवसेना ने कहा कि राजस्व घाटा ऐसे ही बढ़ता रहा तो आर्थिक अराजकता की आग में सबकुछ खत्म हो जाएगा. लॉकडाउन काल में सरकार ने 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किया, लेकिन यह पैसा कब और किस तक पहुंचा? यह रहस्य बना हुआ है. लोगों के हाथ में सीधे पैसा आए बिना व्यापार और अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिलेगी. राज्य केंद्र से लगातार पैसा मांग रहे हैं

गौरतलब है कि कल ही टीआरएस, टीएमसी, डीएमके, आरजेडी, आप, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के सांसदों ने महात्मा गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और राज्यों के बकाए जीएसटी के भुगतान की मांग की. देश के तकरीबन 10 राज्य ऐसे हैं जो जीएसटी कंपनसेशन पर केंद्र की दलील से इत्तेफाक नहीं रखते और वे खुलकर विरोध कर रहे हैं. 


 

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