
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के नागभीड तहसील के कोदेपार गांव में शिकार का पीछा करते समय एक बाघ कुएं में गिर गया. बाघ की दहाड़ सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे. उन्होंने बाघ की जान बचाने के लिए तत्काल वन विभाग को सूचना दी. इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई. रेस्क्यू ऑपरेशन चलकर बाघ को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला. कुएं से निकलते ही बाघ जंगल की ओर दौड़ पड़ा.
नागभीड़ से पांच-छह किमी दूर कोदेपार गांव जंगल से घिरा हुआ है. इस जंगल में बाघ और तेंदुआ सहित अन्य वन्यजीव बड़ी मात्रा में हैं. एक बाघ शिकार की तलाश में कोडेपार गांव के खेतों में घुस गया था. बताया जा रहा है कि बाघ शिकार का पीछा करते समय एक कुएं में गिर गया.
गर्मी के दिन होने के कारण कुएं में पानी कम है. इसलिए बाघ बाहर नहीं जा सका. इसी बीच गांव का एक चरवाहा कुएं के पास अपनी बकरियां चरा रहा था. तभी उसे बाघ की दहाड़ सुनाई दी. उसने कुएं में झांककर देखा, तो उसे एक बाघ दिखाई दिया. चरवाहे ने तुरंत गांव में आकर यह सूचना दी.
ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी. वन परिक्षेत्र अधिकारी सुनील हजारे अपने काफिले के साथ मौके पर पहुंचे. कुएं में रस्सी से बांधकर एक लकड़ी की प्लेट छोड़ी गई. बाघ जैसे ही लकड़ी की प्लेट पर आया वन विभाग के कर्मचारियों ने प्लेट को रस्सी के सहारे ऊपर खींच लिया.
इस दौरान वन विभाग ने सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए थे, ताकि कुएं से बहार आते ही बाघ किसी पर हमला न कर दे. इसके लिए जाल भी बिछाया गया था. मगर, बाघ ने कुएं से बाहर निकलते ही जंगल की ओर दौड़ लगा दी.