
मालदीव चर्चा में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मालदीव सरकार की मंत्री के आपत्तिजनक बयान के बाद दोनों देशों में हंगामा मचा है. भारत ने मालदीव के राजदूत को तलब किया और आपत्ति जताई है. वहीं, मालवीय ने भी एक्शन लिया और तीन मंत्री को सस्पेंड कर दिया है. लेकिन, यह विवाद और हंगामा थमा नहीं है. भारत के प्रति रुख को लेकर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पहले से ही चर्चा में हैं. अब उनकी हफ्तेभर की चीन यात्रा ने भारत को सोचने पर मजबूर कर दिया है. इससे पहले उन्होंने भारत की यात्रा करने के बजाय तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था. इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो मालदीव की सबसे ज्यादा मदद भारत ने की है.
चाहे वो सुनामी हो या माले वॉटर क्राइसिस या फिर कोरोना महामारी के बाद उपजे हालात... भारत ने हर मोर्चे पर मालदीव का साथ दिया और मदद की पेशकश की. दूसरी तरफ देखा जाए तो चीन अपने हित साधने के लिए पड़ोसी मुल्कों को कर्ज के जाल में फंसाता आ रहा है. पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल समेत अन्य देशों की तरह मालदीव भी चीन के उसी कर्ज के जाल में उलझने की तरफ आगे बढ़ रहा है.
'भारत आने के बजाय तुर्की पहुंच गए थे मुइज्जू'
पिछले साल नवंबर में ही मुइज्जू ने मालदीव की सत्ता संभाली थी. उसके बाद दशकों से चली आ रही परंपरा के उलट मालवीय के राष्ट्रपति ने भारत आने के बजाए तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा पर गए और अब वो चीन दौरे पर हैं. WION की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी से पहले मालदीव ने मुइज्जू के भारत दौरे का प्रस्ताव दिया था. मालदीव ने जनवरी के अंत तक राष्ट्रपति मुइज्जू के भारत दौरे का प्रस्ताव रखा था. मालदीव सरकार अभी भी भारत की तरफ से तारीख की पुष्टि का इंतजार कर रही है.
'राष्ट्रपति बनने के बाद सबसे पहले चीन गए'
रिपोर्ट में कहा गया कि मालदीव के प्रस्ताव पर अगर भारत सहमत होता तो भी मुइज्जू नई दिल्ली की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा नहीं करते. क्योंकि उन्होंने पहली यात्रा के रूप में तुर्किये को चुना था और तुर्किये गणराज्य के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के निमंत्रण पर 26 नवंबर को वहां थे. तुर्किये के बाद 30 नवंबर 2023 को संयुक्त अरब अमीरात में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन सीओपी 28 में उनकी भागीदारी हुई. वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पद ग्रहण करने के बाद मुइज्जू का यह पहला आधिकारिक विदेश दौरा है.
'इंडिया आउट नारे लिखी टीशर्ट पहने दिखे मुइज्जू'
जब चीन का समर्थन और भारत विरोधी रुख की बात आती है तो मुइज्जू प्रशासन स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति और झुकाव का एक संदेश देने की लगातार कोशिश कर रहा है. सबसे पहले इसकी शुरुआत चुनावी अभियान में देखने को मिली. मुइज्जू ने 'इंडिया आउट' के मुद्दे पर चुनाव लड़ा. बड़े अक्षरों में 'इंडिया आउट' लिखी लाल टी-शर्ट पहने राष्ट्रपति मुइज्जू की तस्वीरें अभी भी हर किसी के दिमाग में ताजा हैं. राष्ट्रपति मुइज्जू ने दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और आजतक को बताया था कि भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है.
'भारत के साथ समझौता भी रद्द कर दिया'
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कसम खाई कि जीत के बाद वो मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस भेज देंगे. सत्ता में आने के तुरंत बाद उन्होंने भारत से कहा कि वो अपने सैनिकों को वापस बुला ले. मुइज्जू कई बार भारत सरकार से यह आह्वान कर चुके हैं. मुइज्जू ने हाल ही में भारत के साथ हाइड्रोग्राफिक समझौता रद्द कर दिया था, जिसके तहत भारत वहां के समुद्री क्षेत्र का हाइड्रोग्राफिक सर्वे करता था. जिन भारतीय सैनिकों को मालवीय से वापस लौटने की अपील की जा रही है, वो वहां चिकित्सा और मानवीय सहायता के काम में लगे हैं.
'मालदीव में संकट के वक्त भारत ही काम आया'
बीजिंग के साथ देखे जा रहे रुख और बढ़ी हुई भागीदारी निश्चित रूप से मालदीव की विदेश नीति में बदलाव को दर्शा रही है. फिलहाल, भारत यह देख रहा है कि मालदीव किस दिशा में आगे बढ़ रहा है. चूंकि, अब तक मालवीय कई संकटों से घिरा और भारत सबसे पहले मदद करने वाला देश बनकर उभरा है. चाहे वो 2004 की सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदा हो, 2014 का माले जल संकट या 2020 में कोरोना महामारी हो. भारत ने कोरोना महामारी के दौरान ऑपरेशन संजीवनी चलाया था. मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने परिवहन विमान C-130J से दवाओं और इलाज से जुड़ी जरूरी चीजों को मालदीव पहुंचाया था. इससे पहले भारतीय सेना ने वायरल टेस्ट लैब बनाने के लिए मेडिकल दल मालदीव भेजा था. 5.5 टन जरूरी दवाएं उपहार के रूप में दी थीं. मालदीव को मुफ्त में वैक्सीन भेजकर लोगों की जिंदगियां बचाई थीं.
इससे पहले 2014 में जब मालदीव की राजधानी माले में आरओ प्लांट खराब हुए तो पीने के पानी का संकट पैदा हो गया था. पूरे शहर में बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि मच गई थी. ऐसे में मालदीव ने भारत सरकार मदद मांगी थी. पीएम मोदी ने तत्काल मामले को संज्ञान में लिया. भारतीय वायु सेना ने पैक किया हुआ पानी दिल्ली से अराक्कोणम और वहां से माले तक पहुंचाया. सेना ने विमानों के जरिए 374 टन पीने का पानी पहुंचाया था. इसे ऑपरेशन नीर नाम दिया गया था.
मालदीव को मदद करने वालों की पंक्ति में भारत हमेशा पहले नंबर पर खड़ा रहा है. 2004 की सुनामी के दौरान मालदीव की सहायता करने वाला भारत पहला देश था. इस सुनामी में करीब 100 लोग मारे गए थे. 1965 में मालदीव की आजादी के बाद भारत उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में से एक था.
'मुइज्जू के पास रिश्ते संभालने का अभी भी मौका'
लेकिन, 2024 की शुरुआत में कुछ मंत्रियों द्वारा पीएम मोदी को लेकर दिए गए अपमानजनक बयानों से भारत में नाराजगी है और यहां मालदीव का बहिष्कार करने का कैंपेन चलाया जा रहा है. ऐसे में राष्ट्रपति मुइज्जू का स्टैंड काफी मायने रखता है. अगर मुइज्जू के तेवर में भारत के प्रति नरमी आती है तो भारत-मालदीव संबंधों में खटास को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. वरना आने वाले समय में भारत के बॉयकॉट से मालदीव की परेशानियां बढ़ना तय माना जा रहा है. कोरोना महामारी के दरम्यान मालदीव के टूरिज्म को पहले ही बड़ा नुकसान पहुंचा है. मालवीय की जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा टूरिज्म से आता है और वहां सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक ही छुट्टियां मनाने जाते हैं. यानी मालदीव की इकॉनोमी को भारत के नागरिक ही रफ्तार देते आए हैं. मालदीव के पर्यटन क्षेत्र में 70 फीसदी कमाई भारतीय टूरिस्ट से होती है.
चीन के कर्जजाल में फंस गया है मालदीव
मालदीव में मुइज्जू सरकार में गठबंधन में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पार्टी भी है. यामीन ने ही मालदीव को चीन के नजदीक लाने में अहम भूमिका निभाई थी. यामीन के कार्यकाल में मालदीव चीन के काफी करीब पहुंच गया था. यामीन की सरकार में मालदीव की आर्थिक स्थिति भी काफी बिगड़ गई थी. मानवाधिकारों के हनन के आरोपों के कारण भारत और पश्चिमी देशों ने जब मालदीव को कर्ज देने से इनकार कर दिया था, तब चीन ने उसकी मदद की थी. यामीन की सरकार ने चीन से भारी भरकम कर्ज लिया था. 2018 के आखिर तक मालदीव के कुल बाहरी कर्ज में 70 फीसदी से ज्यादा अकेले चीन का था. 2018 में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने बताया कि मालदीव पर चीन का कर्ज तीन अरब 10 करोड़ डॉलर का है. इसमें सरकार से सरकार को दिया कर्ज, सरकारी कंपनियों और मालदीव की सरकार की इजाजत से मिला प्राइवेट सेक्टर का कर्ज भी शामिल है. यानि मालदीव की हालत भी श्रीलंका जैसी हो सकती है जो चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस गया है.
कर्ज चुकाने में मालदीव की हालत खराब
मालदीव की हालत ये है कि उसने चीन से जो भी कर्ज लिया है उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. मालदीव की जीडीपी 540.56 करोड़ अमेरिकी डॉलर की है और मालदीव के बजट का करीब 10 फीसदी हिस्सा चीन को कर्ज देने में चला जाता है. चीन मालदीव में व्यापक स्तर पर निवेश कर रहा है जिसमें बुनियादी ढांचे, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों पर उसकी पकड़ बढ़ गई है. पूर्व राष्ट्रपति नशीद कह चुके हैं इन परियोजनाओं में पैसा नहीं होने के कारण ही मालदीव चीन का पार्टनर बना है और आगे चलकर चीन पैसा देकर इन होटल्स को खरीद सकता है. नशीद मानते हैं कि भविष्य में ये आइलैंड चीन के हाथों में चले जाएंगे.