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पंजाब से बिहार तक, कृषि बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरे देशभर के किसान

aajtak.in
  • 26 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:17 AM IST
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कृषि बिल के खिलाफ देश भर के किसान शुक्रवार को सड़कों पर उतरे. पंजाब से लेकर बिहार तक, किसानों ने संसद से पारित किए गए कृषि संबंधी विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन किया. बिहार और पंजाब में किसान सबसे ज्यादा आंदोलित रहे. जहां रेलवे ट्रैक पर भी प्रदर्शन हुआ और सड़कों पर भी चक्का जाम किया गया. इसके अलावा दक्षिण भारत में भी कई जगहों पर प्रदर्शन देखने को मिले.  

(Photo: PTI)

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दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को भारत बंद बुलाया गया. किसानों के द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में रेल रोको और रास्ता रोको अभियान चलाया जा रहा है. इस बंद को कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला है. RJD नेता तेजस्वी यादव ने कृषि बिल के खिलाफ ट्रैक्टर रैली निकाली है. इस दौरान तेजस्वी ने कहा कि कृषि बिल किसान विरोधी है. उन्होंने मोदी सरकार पर कृषि क्षेत्र को कॉर्पोरेट के हाथों में देने का आरोप भी लगाया. 

(Photo: @yadavtejaswi)

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बंद के दौरान किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की शुरुआत गुरुवार से ही हो चुकी है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और केंद्र सरकार से बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

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कृषि बिल के खिलाफ भारत बंद का हरियाणा में भी असर देखने को मिला. किसानों की ओर से जगह-जगह चक्का जाम गया है. वहीं पंजाब के फरीदकोट में दूध, सब्जी, राशन की दुकान, पेट्रोल पंप, बस स्टेंड ,छोटी-बड़ी दुकानें सब बंद रहीं. फरीदकोट से दिल्ली नेशनल हाइवे 54 को पूरी तरह जाम किया गया.

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बता दें कि इस बिल पर किसानों की असली चिंता MSP और कृषि मंडियों को लेकर है. उन्हें डर है कि नए बिल के प्रावधानों की वजह से कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा. कुछ संगठन और सियासी दल चाहते हैं कि MSP को बिल का हिस्सा बनाया जाए ताकि अनाज की खरीदारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे ना हो. जबकि सरकार साफ-साफ कह चुकी है कि MSP और मंडी व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी.

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