भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की वजह से तबाही मची हुई है. नेपाल में लगातार भारी बारिश हो रही है, जिसकी वजह से कई नदियां उफान पर हैं. नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार पर भी पड़ा है. बिहार के कई जिले भी बाढ़ की चपेट में हैं. बाढ़ और भूस्खलन की वजह से नेपाल में दो दिनों में करीब 200 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं करीब 42 लोग लापता हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में मूसलाधार बारिश होने की वजह से पूर्वी और मध्य नेपाल के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए हैं. वहीं नेपाल के अधिकांश जिलों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. नेपाल सेना ने देश भर से 162 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला है. बाढ़ में डूबे करीब 4000 लोगों को नेपाल की सेना और पुलिस द्वारा बचाया गया. वहीं बाढ़ के हालातों को देखते हुए नेपाल सरकार ने तीन दिनों तक स्कूलों में छुट्टी के निर्देश दिए हैं.
नेपाल के काठमांडू में हालात बहुत खराब हैं. झयाप्ले नदी में भूस्खलन के कारण काठमांडू में आवागमन पर असर पड़ा है. लोगों का कहना है कि पिछले 40-45 सालों में काठमांडू में इतनी विनाशकारी बाढ़ नहीं देखी गई है. आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन प्राधिकरण ने नेपाल के 56 जिलों में बाढ़ और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया है. वहीं काठमांडो की मुख्य नदी बागमती मूसलाधार बारिश के बाद से खतरे के निशान से सात फुट ऊपर बह रही है.
बाढ़ और भूस्खलन की वजह से नेपाल के कई राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़कें ब्लॉक हैं. ICIMOD की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शुक्रवार और शनिवार को पूर्वी और मध्य नेपाल के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बारिश के बाद काठमांडू की मुख्य नदी बागमती खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव की प्रणाली और मानसून की रेखा का सामान्य से अधिक उत्तर की ओर होना शनिवार की असाधारण रूप से तेज बारिश का कारण है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से एशिया भर में बारिश की मात्रा और समय में बदलाव हो रहा है, लेकिन बाढ़ के बढ़ते प्रभाव का एक प्रमुख कारण पर्यावरण है, जिसमें अनियोजित निर्माण भी शामिल है, विशेष रूप से बाढ़ के मैदानों में, जिसके कारण जल-धारण और जल निकासी के लिए अपर्याप्त क्षेत्र बचता है.
नेपाल की बाढ़ का असर बिहार में भी देखने को मिल रहा है. बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिसकी वजह से बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं. कोसी नदी के बीरपुर बैराज के सभी 56 और गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं. बाढ़ के खतरे को देखते हुए उत्तर, दक्षिण और मध्य बिहार में अलर्ट जारी किया गया है. नदी किनारे और निचले इलाके से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है. राज्य के 26 जिलों में 30 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
नेपाल और बिहार से सटे यूपी के महराजगंज में भी बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. वहां भारी बारिश की वजह से पुलिस चौकी, घर और सड़कें लबालब हो चुकी हैं. नेपाल ने बड़ी गंडक में 6.5 लाख क्यूसेक पानी किया डिस्चार्ज किया है, जिसके कारण यूपी और बिहार के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं. जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है और महाराजगंज में फ्लड फाइटिंग के लिए सभी एसडीएम ने कमान संभाल ली है.
बिहार सरकार पिछले कई दिनों से दावा कर रही थी कि तटबंध सुरक्षित हैं, लेकिन पिछले 24 घंटे में तीन जिलों में कई तटबंध टूट चुके हैं. वहीं बिहार के चंपारण, गोपालगंज, अररिया, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया में पानी भर गया. इसके अलावा गंगा में उफान से बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर में पहले से ही बाढ़ जैसे हालात हैं. सीतामढ़ी जिले में बागमती नदी पर बना तटबंध रविवार को टूट गया. इससे कई गांव और निचले इलाकों में पानी भर गया. वहीं, भारी बारिश से शनिवार रात गोपालपुर के पास कोसी नदी के तटबंध से भी रिसाव शुरू हो गया.
जल संसाधन विभाग की टीमें 24x7 आधार पर तटबंधों की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी कटाव या खतरे का पता चलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके. विभाग के तीन चीफ इंजीनियर, 17 एक्जक्यूटिव इंजीनियर, 25 असिस्टेंट इंजीनियर और 45 जूनियर इंजीनियर 24x7 आधार पर काम कर रहे हैं और हाई अलर्ट पर हैं. राज्य के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
हालात को सामान्य करने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार काम कर रही हैं. जानकारी के अनुसार, इस बार बचाव कार्य को लेकर पहले ही अलर्ट मोड पर काम हो रहा था. लोगों को आगाह किया गया था. स्थिति पर नजर रखी जा रही थी. उधर, राहत की खबर आई है कि नेपाल में बारिश थम गई है, जिससे बिहार में भी हालात जल्द ही सामान्य हो सकते हैं.